PM मोदी दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के शताब्‍दी समारोह में हुए शामिल, कहा- ‘2047 तक विकसित भारत बनाना हमारा लक्ष्य’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की तीन इमारतों का वर्चुअल शिलान्यास भी किया। ये तीन इमारतें प्रौद्योगिकी संकाय, एक कंप्यूटर केंद्र और एक शैक्षणिक ब्लॉक के लिए हैं। पीएम ने दो कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया। दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मई 1922 को हुई थी। पिछले 100 वर्षों में, विश्वविद्यालय का काफी विकास और विस्तार हुआ है और अब इसमें 86 विभाग, 90 कॉलेज, 6 लाख से अधिक छात्र हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ बातचीत भी की।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबोधित भी किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्‍ली यूनिवर्सिटी का इतिहास खास है। यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि एक मूवमेंट है। इस यूनिवर्सिटी ने अपने लंबे इतिहास में हर आंदोलन को जिया है।

उन्होंने कहा, “कभी डीयू में केवल 3 कॉलेज थे, आज 90 से ज्‍यादा हैं। कभी भारत की इकॉनमी खस्‍ता हालत में थी, आज दुनिया की टॉप 5 इकॉनमी में शामिल हो गई है। अब डीयू में पढ़ने वाली लड़कियों की संख्‍या लड़कों से ज्‍यादा हो गई है। इसका अर्थ है कि शिक्षण संस्‍थाओं की जड़ें जितनी गहरी होती हैं, देश की शाखाएं उतनी ही फैलती हैं। इसी तरह, हमारे देश में लिंग अनुपात में काफी सुधार हुआ है। अब हमारा लक्ष्य है, 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना।”

मोदी ने कहा कि हमारे एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी गाइडिंग फोर्स है भारत की युवा शक्ति. एक समय था जब स्‍टूडेंट्स किसी इंस्टिट्यूट में एडमिशन से पहले केवल प्‍लेसमेंट को प्राथमिकता देते थे। युवा अब कुछ नया करना चाहता है। 2014 से पहले देश में कुछ सौ स्‍टार्टअप थे। अब भारत में स्‍टार्टअप की संख्‍या 1 लाख पार कर गई है।

उन्होंने कहा, “आज देशभर में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का निर्माण हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, एम्स जैसे शैक्षणिक संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये संस्थान नए भारत की आधारशिला हैं।”

लेकिन आज, युवा जिंदगी को इसमें बांधना नहीं चाहता, वो कुछ नया करना चाहता है… अपनी लकीर खुद खींचना चाहता है।

पीएम मोदी ने कहा, ‘AI और VR अब साइंस फिक्‍शन नहीं, हमारे जीवन का हिस्‍सा हैं। ड्राइविंग से लेकर सर्जरी तक, सभी कुछ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संभव हो रहा है।’

उन्होंने कहा, “2014 में, QS वर्ल्ड रैंकिंग में केवल 12 भारतीय विश्वविद्यालय थे। हालांकि, अब यह संख्या बढ़कर 45 हो गई है. भारत के शिक्षा संस्थान दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “निष्ठा धृति सत्यम्, विश्वविद्यालय का ये ध्येय वाक्य अपने हर एक छात्र के जीवन में मार्गदर्शक दीपक की तरह है… जिसके पास ज्ञान है वही सुखी है, वही बलवान है। वास्तव में वही जीता है जिसके पास ज्ञान है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश के युवाओं को भारत का भविष्‍य बताया। प्रधानमंंत्री का संबोधन खत्‍म होते ही डीयू के आयोजन परिसर में ‘जय श्री राम’ के नारे गूंजने लगे।

इससे पहले शताब्दी समारोह को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी संबोधित किया और कहा, ”डीयू के 100 साल पूरे होने पर हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू की गई। पिछले 3 वर्षों में एनईपी को पूरी तरह से लागू करने के लिए मैं डीयू को बधाई देता हूं।”

उन्होंने कहा, भारत सबसे पुराना लोकतंत्र है. यह लोकतंत्र की जननी है. संसद की नई बिल्डिंग बन चुकी है. प्रधानमंत्री हर बार एक ही बात कहते हैं, ‘यही समय, सही समय’, ‘आज का क्षण भारत का क्षण है’. हमें इस पल को जीना चाहिए और अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।’

दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के VC और प्रोफेसर योगेश सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के स्‍वागत में विशेष कविता पढ़ी। उन्‍होंने कहा, ‘ऐसे प्रधानमंत्री कहां मिलते हैं…’. उन्‍होंने प्रधानमंत्री मोदी को अद्भुत रूप से प्रभावी, मेहनती और देशप्रेमी भी बताया। उन्‍होंने शिक्षामंत्री धम्रेंद्र प्रधान का भी स्‍वागत किया।

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