प्रदर्शनकारी पहलवानों ने पीएम मोदी से मांगा न्याय, कहा- PM हमारे ‘मन की बात’ भी सुनें

प्रदर्शनकारी पहलवानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी ‘मन की बात’ भी सुनने का आग्रह किया है। कई शीर्ष पहलवान दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं। यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जांच की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बजरंग पुनिया ने कहा कि उनकी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक न्याय नहीं होता। विनेश फोगट ने भी प्रधानमंत्री से पहलवानों की मांगों को सुनने का आग्रह किया।

विनेश फोगट ने कहा, “प्रधानमंत्री को हमारे मन की बात भी सुननी चाहिए। करोड़ों लोग हमारे समर्थन में बैठे हैं। यह हमारी ताकत है। हम नहीं जानते कि कितने सांसद और विधायक हैं।”

डब्ल्यूएफआई प्रमुख और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह कई महिला पहलवानों द्वारा उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद से विवादों के केंद्र में हैं। प्रदर्शनकारी पहलवानों ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) से बाहर करने की मांग की है।

बृजभूषण सिंह ने कहा कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं, अगर इससे प्रदर्शनकारी घर लौट जाएं और चैन की नींद सोएं। उन्होंने कहा, ‘मेरे इस्तीफे के बाद अगर वे (प्रदर्शनकारी) वापस (अपने घर) जाएंगे और चैन की नींद सोएंगे, तो मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं।’

बृजभूषण सिंह ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने उन पर आरोप लगाए हैं, वे एक ही अखाड़े के हैं।

WFI प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि, “हरियाणा के 90% एथलीट और अभिभावक भारतीय कुश्ती महासंघ पर भरोसा करते हैं। कुछ परिवार और लड़कियां जिन्होंने आरोप लगाए हैं, वे एक ही ‘अखाड़े’ से संबंधित हैं। उस ‘अखाड़े’ के संरक्षक दीपेंद्र हुड्डा हैं।” कैसरगंज से भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह ने दावा किया कि प्रदर्शनकारी विपक्ष के हाथों का “खिलौना” मात्र हैं।

उन्होंने कहा, “ये सभी खिलाड़ी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलौने बन गए हैं। उनका मकसद राजनीतिक है, मेरा इस्तीफा नहीं है।”

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने सात महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की हैं। पहली प्राथमिकी एक नाबालिग पहलवान के आरोपों से संबंधित थी और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी, जबकि दूसरी शील भंग करने से संबंधित थी।

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