पटियाला सेंट्रल जेल में बंद पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को दस महीने जेल में बिताने के बाद शनिवार शाम को रिहा कर दिया गया। नीले रंग का कुर्ता और पगड़ी पहने सिद्धू को हाथ में किताब लिए जेल से बाहर निकलते देखा गया। 59 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर की रिहाई पर उनका भव्य स्वागत करने के लिए कांग्रेस के कई नेता और समर्थक पटियाला जेल के बाहर जमा हुए थे। उन्हें ढोल के साथ देखा गया और ‘नवजोत सिद्धू जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए गए।
क्रिकेटर से नेता बने सिद्धू के स्वागत के लिए जेल के बाहर खड़े उनके समर्थकों ने ढोल वादकों का इंतजाम किया था। नवजोत सिद्धू के प्रशंसक और समर्थक उनका भव्य स्वागत करने के लिए जेल के बाहर बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
सिद्धू ने पटियाला जेल से निकलते ही मीडिया से बात की। सिद्धू ने कहा कि, “संविधान को मैं अपना ग्रंथ मानता हूं, तानाशाह हो रहा है। जो संस्थाएं संविधान की ताकत ती वही संस्थाएं आज गुलाम बन गई हैं। मैं घबराता नहीं हूं, मैं मौत से डरता नहीं हूं क्योंकि मैं जो करता हूं वो पंजाब की अगली पीढ़ी के लिए कर रहा हूं। अभी लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं है। पंजाब में राष्ट्रपति शासन लाने की साजिश की जा रही है, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। पंजाब को कमजोर करने की कोशिश होगी तो कमजोर हो जाएंगे”।
नवजोत सिद्धू के स्वागत के लिए सिद्धू के समर्थकों द्वारा पटियाला शहर में कई जगहों पर नवजोत सिद्धू के कई पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए थे।
जेल के बाहर समर्थकों में से एक ने कहा कि सिद्धू की रिहाई से पार्टी कार्यकर्ता काफी खुश हैं।
बता दें कि 1988 के एक रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख को पिछले साल 20 मई को जेल भेजा गया था। उनके वकील के अनुसार, कारावास के दौरान नवजोत सिद्धू के अच्छे आचरण के कारण रिहाई पहले हो रही है।
