मैनपुरी उपचुनाव: बीजेपी ने नेताजी के चेले और शिवपाल यादव के करीबी रहे रघुराज सिंह शाक्य को मैदान में उतारा, सपा की डिंपल यादव के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव

भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को एक लोकसभा सीट और यूपी की दो विधानसभा समेत पांच विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट से डिंपल यादव के खिलाफ बीजेपी ने रघुराज सिंह शाक्य को टिकट दिया है।

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की रामपुर विधानसभा सीट से आकाश सक्सेना को टिकट दिया तो वहीं खतौली विधानसभा सीट से राजकुमारी सैनी को प्रत्याशी बनाया है। इसके साथ साथ राजस्थान, बिहार और छत्तीसगढ़ की एक-एक विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है। पार्टी ने राजस्थान की सरदारशहर विधनासभा सीट पर अशोक कुमार पिंचा, बिहार की कुरहानी विधानसभा सीट पर केदार प्रसाद गुप्ता और छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर सीट पर ब्रह्मानंद नेताम को टिकट दिया है।

मैनपुरी उपचुनाव के लिए बीजेपी ने जिस रघुराज सिंह शाक्य को टिकट दिया है। उन्होंने कुछ समय पहले शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को छोडकर बीजेपी का दामन थाम लिया था। हालांकि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ये शिवपाल यादव के अभी भी करीबी है। 2022 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में शिवपाल ने अखिलेश से इटावा सदर की सीट रघुराज शाक्य के लिए मांगी थी, लेकिन ये सीट किसी और को दे दी गई थी। उसके बाद रघुराज शाक्य ने बीजेपी का दामन थाम लिया था।

समाजवादी पार्टी की तरफ से मैनपुरी उपचुनाव में एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को उतारा गया है। मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण ये सीट खाली हुई है। यादव और शाक्य बहुल इस सीट पर बीजेपी ने शाक्य कैंडिडेट उतारकर एसपी को घेरने की कोशिश की है। रघुराज शाक्य, मैनपुरी संसदीय क्षेत्र के जसवंत नगर विधानसभा क्षेत्र से ही आते हैं, जो कि शिवपाल यादव का गढ़ है। ऐसे में अगर जसवंतनगर, भोगांव और मैनपुरी सदर में बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत कर लेती है तो अखिलेश यादव के लिए ये लड़ाई मुश्किल हो सकती है। इस समय भोगांव और मैनपुरी सीट पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि जसवंतनगर से शिवपाल यादव विधायक हैं और यहीं से रघुराज शाक्य आते हैं। बीजेपी ये मान कर चल रही है कि शिवपाल यादव का समर्थन रघुराज शाक्य को जरूर मिलेगा।

मैनपुरी लोकसभा सीट पर रघुराज को टिकट देने की क्या हो सकती है  वजह?

1. भाजपा ने जातिगत आंकड़ों को साधने की कोशिश की। यादव के बाद शाक्य जाति के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है।
2. लोकसभा क्षेत्र की जसवंतनगर विधानसभा सीट के मतदाताओं में सेंध लगाने की कोशिश।
3. शिवपाल की पार्टी छोड़ने के बावजूद शिवपाल गुट आज भी उनके साथ है।
4. राजनीतिक अनुभव। वह दो बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके हैं।

रघुराज शाक्य के बारे में जानिए-

फरवरी 2022 में बीजेपी में एंट्री करने से पहले रघुराज शाक्य प्रसपा (शिवपाल की पार्टी) के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर थे। रघुराज शाक्य 1999 और 2004 में सपा के टिकट पर इटावा से सांसद चुने गए थे। उन्होंने 2012 में सपा के टिकट पर इटावा सदर सीट से विधानसभा का चुनाव भी जीता था। रघुराज शाक्य ने 27 जनवरी 2017 को सपा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद रघुराज शाक्य, शिवपाल सिंह यादव की प्रसपा में शामिल हो गए थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में रघुराज शाक्य ने इटावा सदर सीट से दावेदारी की थी, लेकिन सपा ने यहां से सर्वेश शाक्य को मैदान में उतार दिया था। इस वजह से रघुराज शाक्य ने प्रसपा छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था।

मैनपुरी लोकसभा सीट पर सबसे अधिक हैं यादव वोटर्स-

मैनपुरी की सीट पर 35 फीसदी यादव मतदाता हैं जबकि अन्य 65 फीसदी में शाक्य, ठाकुर, ब्राह्मण, अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदाय के मतदाता हैं।

बीजेपी ने रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए जिस आकाश सक्सेना को अपना उम्मीदवार बनाया है उसे रामपुर में आजम खान का धूर विरोधी माना जाता है। आजम खान को तीन साल की सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई थी। ऐसे में उनकी रामपुर विधानसभा सीट भी खाली हो गई और अब इस पर उपचुनाव होने जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की खतौली विधानसभा सीट पर बीजेपी ने राजकुमारी सैनी को मौका दिया है। राजकुमारी सैनी विक्रम सिंह सैनी की पत्नी हैं। मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित एक मामले में बीजेपी विधायक विक्रम सैनी की सदस्यता रद्द हो गई थी, जिसके बाद ये सीट खाली थी। इस सीट पर सपा गठबंधन से आरएलडी ने मदन भैया को उम्मीदवार बनाया है।

बता दें कि इन सभी सीटों पर पांच दिसंबर को वोटिंग होगी और आठ दिसंबर को वोटों की गिनती होगी।

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