देश में कोरोना से स्थिति गंभीर है हर रोज़ अनगिनत मौतें सुविधा के अभाव में हो रही है, महंगे इलाज और अस्पताल के बीच भागते दौड़ते परिजनों की आस टूट रही है अपनों को बचाने में जो खुश किस्मत है उसको बेहतर इलाज और देखभाल मिल रही है। पर हर आदमी को ये भी नसीब नहीं हो रहा। ना तो पर्याप्त डॉक्टरों की टीम है, ना पैरा मेडिकल स्टॉफ जो इस तरह की महामारी को संभालने के लिए तैयार हो। केंद्र सरकार इन दुर्व्यवस्था और अभाव में हो रही मौतों का आंकड़ा छुपाने की भरपूर जुगत में है। पिछले एक साल के बाद ये साल भी कोरोना के रूप में भयानक साबित हुआ है, जानकारी और और अभाव में लोग अपनों की लाशों को छोड़कर जा रहे है। ग्रामीण अंचलों में स्थिति ज्यादा खतरनाक है।
इसी कड़ी में आज उत्तर प्रदेश समेत बिहार के बक्सर में गंगा में लाशें तैरती हुई दिखी, कुछ जगहों पर जानवरों के द्वारा इन मृत शरीर को खाते हुये भी देखा गया। बिहार सरकार ने कहा कि ये लाशें उनके प्रदेश की नहीं।
माना जा रहा है ये लाशें ऊत्तरप्रदेश या उत्तराखंड से होते हुए बिहार पहुंची है, तो ये माना जाये कि ये लाशें इन्हीं दोनों राज्यों से यहाँ तक पहुंची होगी। पर सवाल ये है, क्यों ये लाशें इस तरह नदी में छोड़ी गई है, या तो सरकार अपने आंकड़े दुनिया से छुपाना चाहती है या फिर उसके पास इस तरह के मामलों से निपटने के लिए कोई प्लानिंग नहीं है।
देश के स्वास्थ्य को प्रभावित करके महामारी को दावत दे रही है ये लावारिश लाशें। पानी में ऐसे अगर ये लाशें सड़ती रही तो पानी जनित महामारी का खतरा देश पर मंडरा रहा है। देश अभी पूरी तरह से कोरोना से लड़ने को तैयार नहीं है ऐसे में ये स्थिति कैसे संभाली जाएंगी। राज्य सरकारों को अपने प्रदेश की जनसंख्या की संख्या को सुरक्षित करने के लिए तत्काल ऐसे मामलों को निपटाने की कवायद करने की जरूरत है। क्योंकि नदियों का ये पानी जल आपूर्ति के द्वारा लोगों के घरों में रोज़ सुबह पहुंचता है जाने अनजाने वो दैनिक दिनचर्या में इसका इस्तेमाल कर रहे है।
स्वास्थ्य मंत्रालय को इस दिशा में दिशा निर्देश जारी करके राज्यों से इस बाबत बात करने की जरूरत है।
