सिख कैदियों की रिहाई के लिए बना नया संगठन सियासी सिख कैदी रिहाई मोर्चा (दिल्ली) होगा नाम

नई दिल्ली: जेलों में बंद सिख कैदियों की स्थायी रिहाई के लिए दिल्ली के बुद्धिजीवियों ने ‘सियासी सिख कैदी रिहाई मोर्चा (दिल्ली)’ नाम से एक संगठन बनाया है। इसका मुख्य कार्य सिख कैदियों के अधिकारों की वकालत करने वाले समूह का होगा। अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मोर्चे के कार्यकारिणी सदस्यों ने दावा किया कि वे भारतीय संविधान के दायरे में रहकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर सिख कैदियों की रिहाई के लिए लड़ाई लड़ेंगे। गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मोर्चा के कार्यकारिणी सदस्यों ने मोर्चे की आवश्यकता, मोर्चे का कार्यक्षेत्र, जेलों में बंद सिख कैदियों की जानकारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा 2019 में गुरु नानक साहिब जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर 8 सिख कैदियों को रिहा करने की घोषणा करने के बावजूद दिल्ली सरकार द्वारा भाई दविंदर पाल सिंह भुल्लर और कर्नाटक सरकार द्वारा भाई गुरदीप सिंह खैहरा को रिहा करने में असफल रहने की आलोचना भी की। इसके अलावा बीते दिनों तिहाड़ जेल में कथित तौर पर कत्ल हुए 2 सिख कैदियों के मामले में जेल प्रशासन की भूमिका बारे सवाल उठाए।
मोर्चे के नेताओं के द्वारा दिल्ली और कर्नाटक सरकारों को दोनों सिख कैदियों की रिहाई में बाधा को दूर करने के लिए लिखे गए पत्रों का हवाला देते हुए भाई भुल्लर और भाई खैहरा की तत्काल रिहाई की मांग की गई। नेताओं ने दावा किया कि सिख कैदियों की रिहाई में आने वाली बाधाओं को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करने के लिए मोर्चे के नेता समान विचारधारा वाले संगठनों, सिंह सभाओं, सेवक जत्थों और राजनीतिक दलों के साथ संपर्क करके समाज में सकारात्मक माहौल बनाने की पहल करेंगे। नेताओं ने स्पष्ट किया कि हम सिख कैदियों की रिहाई के लिए बिना किसी हिचकिचाहट के किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दल से मिलने के लिए तैयार हैं। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता तथा कार्यकारिणी सदस्य चमन सिंह, अवतार सिंह कालका, डॉ. परमिंदर पाल सिंह तथा दलजीत सिंह ने अपने विचार रखें। मनप्रीत कौर, संगत सिंह, हरजीत सिंह टेक्नो, जोरावर सिंह, गुरपाल सिंह आदि इस मौके उपस्थित थे।

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