शाहिद नक़वी: ये एक दम सच है कि बेहद प्रगतिशील इंसान भी उस सर्वशक्तिमान के सामने बेबस है।कोरोना वायरस ने ये बता दिया है कि उससे हो रही मौत किसी भी प्रलय,युद्ध या प्राकृतिक आपदा से बड़ी और डरावनी है।लोग रिपोर्ट पास्टिव आने के बाद अपनों से मिल नहीं सकते हैं।परिजन अपनों को आखिरी बार देख तक नहीं देख पा रहे हैं।न ही दुनिया से जा चुके अपनों के पार्थिव शरीर पर सिर पटक कर रो पा रहे हैं।ये भी कितना अजीब है और कैसा माहौल है कि तरक्की के पायदान पर चढ़ती दुनिया में भी परिजन और मृतक दोनों अकेलेपन और असहाय होने के घुटन से दो चार हो रहे हैं।मरने वाला अपने जीवन काल में चाहे जितना समाजसेवी और चर्चित रहा हो,कोरोना काल में मौत के बाद उतने कन्धें नहीं मिल रहे हैं जितने का मरने वाला हकदार है।समय की मजबूरी देखिए कि रूह छोड़ चुके जिस्म श्मशान और कब्रिस्तान जिस सम्मान के साथ भारतीय परम्परा के अनुसार पहुंचना चाहिए,नहीं पहुंच रहे हैं।कभी कार की छत पर,कभी बाईक से और कभी आटो पर एक तरह से लाद कर पहुंच रहे हैं।ये कैसा असहनीय दर्द होगा अपनों का।वह सारी रस्में जो सदियों से हम करते आए हैं,कोरोना का ऐसा खौफ कि अब वह खुद रस्म बन गई हैं।लोगों का डर ही तो है कि परम्पराओं से परहेज़ करना पड़ रहा है।
पिछले क़रीब तीन हफ़्तों से कोरोना संक्रमण से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में हर तरफ़ इन्हीं चीज़ों के अकाल की चर्चा है और कोरोना संक्रमित लोगों के परिजन इनके लिए दर-दर भटक रहे हैं, सोशल मीडिया के ज़रिए एक-दूसरे से मदद मांग रहे हैं और मदद के अभाव में कई मरीज़ दम तोड़ रहे हैं.
मंगलवार को भी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य भर में जहां 32,993 नए संक्रमित मिले हैं वहीं 265 लोग संक्रमण की वजह से जान गँवा चुके हैं.
राज्य में पिछले साल महामारी शुरू होने के बाद संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या 11 हज़ार से ऊपर हो चुकी है और तीन लाख से ज़्यादा लोग अभी भी कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं. हर दिन इस संख्या में हज़ारों का इज़ाफ़ा हो रहा है.राज्य सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद कोरोना संक्रमितों को इलाज, ऑक्सीजन और दवाओं के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. राजधानी लखनऊ का हाल ऐसा है कि यदि किसी अस्पताल से एक मरीज डिस्चार्ज होता है तो 100 मरीज भर्ती के लिए कतार में खड़े मिलते हैं.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब राज्य में ‘किसी चीज़ की कोई कमी’ जैसी घोषणा जिस वक़्त की, उसके बाद भी यानी सोमवार को बीजेपी के मेरठ से सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपने संसदीय क्षेत्र में स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्याप्त अव्यवस्थाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया.
राजेंद्र अग्रवाल ने पत्र में लिखा है, “मेरठ के सभी सरकारी और ग़ैर सरकारी अस्पताल ऑक्सीजन की अपर्याप्त आपूर्ति के संकट से जूझ रहे हैं. इस समय मेरठ में लगभग 35 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है लेकिन उसके सापेक्ष 10 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की ही आपूर्ति हो पा रही है.”हालांकि सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि एल-1 के 01 लाख 16 हजार बेड्स, एल-2 व एल-3 के 65000 बेड्स उपलब्ध हैं और जल्दी ही इन बेड्स की संख्या को दोगुना किया जाएगा. सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि पिछले 4-5 दिनों में कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट दर्ज की गई जबकि संक्रमित लोगों में रिकवरी दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.दरअसल, अस्पतालों, दवाइयों और ऑक्सीजन के अभाव संबंधी शिकायतें इससे पहले भी राज्य के कैबिनेट मंत्रियों से लेकर सांसद, विधायक और पार्टी के पदाधिकारी तक सार्वजनिक रूप से कर चुके हैं. कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक का इस संबंध में पत्र काफ़ी चर्चा में रहा और उन्होंने साफ़तौर पर लिखा था कि लखनऊ में इतिहासकार योगेश प्रवीन का निधन महज़ इसलिए हो गया क्योंकि उन्हें समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी. बावजूद इसके मुख्यमंत्री का ‘सब कुछ होने’ का दावा लोगों को हैरान करने वाला है.
