पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के आरोपियों में से एक सचिन बिश्नोई को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने अजरबैजान के बाकू से भारत प्रत्यर्पित किया है। पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सचिन बिश्नोई उर्फ सचिन थापन की 10 दिन की रिमांड दी है और दिल्ली पुलिस को उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
स्पेशल सीपी एचजीएस धालीवाल ने कहा, ”केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2022 में दिल्ली सीपी और डीजी एनआईए के साथ बैठक की और दोनों संगठनों को नार्को-आतंकवाद और संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ काम करने का आदेश दिया था…आज, सचिन बिश्नोई (आरोपी) (सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में) बाकू, अजरबैजान से प्रत्यर्पित किया गया है और हम उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई करेंगे।”
सचिन को जब अजरबैजान से गिरफ्तार किया गया था, तब उसके पास से फर्जी पासपोर्ट भी मिला। दरअसल, सचिन अपना पूरा नाम सचिन थापन लिखता है, जबकि उसके पास से तिलक राज टूटेजा के नाम का पासपोर्ट बरामद किया गया था। सचिन के पिता का असली नाम शिव दत्त है, जबकि फर्जी पासपोर्ट में उसके पिता का नाम भीम सेन लिखा हुआ था।
29 मई 2022 को मशहूर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की सरेआम हत्या कर दी गई थी। उनकी गाड़ी को घेरकर शूटर्स ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। ये शूटर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंग के थे। हत्याकांड कितना भयावह था इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पोस्टमार्टम में सिद्धू के शरीर पर गोलियों के 24 निशान मिले थे।
पंजाबी गायक की मौत के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक गैंगस्टर सचिन बिश्नोई को गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की एक टीम को अजरबैजान भेजा गया था। सचिन बिश्नोई, जो कुख्यात अपराधी लॉरेंस बिश्नोई का भतीजा है, पिछले साल मई में हत्या के बाद से फरार था और जाली पासपोर्ट का उपयोग करके देश से भाग गया था।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल सोमवार रात तक अजरबैजान पहुंच गई। एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट के दो इंस्पेक्टरों सहित लगभग चार अधिकारियों की संयुक्त टीम को सचिन बिश्नोई के भारत प्रत्यर्पण को सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया था।
घटना के बाद से ही सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में सचिन बिश्नोई की संलिप्तता गहन जांच का विषय रही है। उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण से हत्या मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है।
पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की मनसा जिले के जवाहरके गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एक दिन बाद, लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के प्रमुख सदस्य गोल्डी बराड़ ने एक फेसबुक पोस्ट में स्वीकार किया था कि उसने बदला लेने के लिए हत्या की योजना बनाई थी। बाद में पुलिस ने बरार को हत्या का मास्टरमाइंड बताया था।
