ऐसे समय में जब तमिलनाडु के एक कैबिनेट मंत्री नौकरी रैकेट घोटाले में अपनी कथित भूमिका को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की आलोचना का सामना कर रहे हैं, प्रदेश सरकार ने राज्य में मामलों की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है। यह कहते हुए कि सीबीआई को राज्य में जांच के लिए तमिलनाडु सरकार से अनुमति लेनी चाहिए, गृह विभाग ने कहा कि यह प्रथा पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, मिजोरम, पंजाब और तेलंगाना में पहले से ही मौजूद है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और मेघालय ने भी सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है।
Breaking: Tamil Nadu government withdraws general consent for CBI.
The agency will have to now obtain permission of the TN govt before conducting any investigation in the state.
Move comes amidst DMK’s criticism against Union BJP Govt for allegedly misusing central agencies. pic.twitter.com/fpCV0P3pHV
— Shilpa (@Shilpa1308) June 14, 2023
केंद्रीय जांच एजेंसी को अब राज्य में कोई भी जांच करने से पहले तमिलनाडु सरकार से अनुमति लेनी होगी। तमिलनाडु सीबीआई द्वारा जांच के लिए अपनी सामान्य सहमति वापस लेने वाला दसवां भारतीय राज्य बन गया।
तमिलनाडु सरकार का यह कदम उस दिन आया है जब तमिलनाडु के बिजली मंत्री वी सेंथिल बालाजी को राज्य के परिवहन विभाग में नौकरी के लिए नकद घोटाले से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम (डीपीएसईए) द्वारा शासित है। यह कानून सीबीआई को दिल्ली पुलिस की एक विशेष शाखा बनाता है और इस प्रकार इसका मूल अधिकार क्षेत्र दिल्ली तक ही सीमित है। अन्य मामलों के लिए, सीबीआई को उस राज्य सरकार की सहमति की आवश्यकता होती है जिसके क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में उसे जांच करनी है।
डीपीएसई अधिनियम के अनुसार, केंद्र सरकार किसी राज्य में किसी मामले की जांच के लिए सीबीआई को अधिकृत कर सकती है, लेकिन केवल संबंधित राज्य सरकार की सहमति से। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय किसी भी राज्य में उसकी सहमति के बिना भी सीबीआई जाँच का आदेश दे सकती है।
हालांकि, तमिलनाडु सरकार द्वारा सामान्य सहमति वापस लेने के बावजूद, सीबीआई पुराने मामलों की जांच तब तक जारी रख सकती है जब तक कि राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सहमति वापस नहीं ले ली जाती। इसके अलावा, जांच एजेंसी उन मामलों की जांच करना भी जारी रख सकती है जो इसे अदालत के आदेश द्वारा दिए गए थे।
मालूम हो कि जिस मामले में बालाजी को गिरफ्तार किया गया है, वह राज्य के परिवहन विभाग में नौकरी के लिए नकद घोटाले से जुड़ा है। ये मामला 2011-16 से एआईएडीएमके शासन में परिवहन मंत्री के रूप में बालाजी के कार्यकाल के दौरान हुआ था। सेंथिल पर लगे आरोप एक भर्ती घोटाले से संबंधित हैं जिसने 2014-15 में राज्य को हिलाकर रख दिया था। यह छापेमारी सुप्रीम कोर्ट द्वारा द्रमुक के कद्दावर नेता के खिलाफ नौकरी के बदले नकद घोटाले की पुलिस और ईडी को जांच की अनुमति दिए जाने के महीनों बाद हुई है। सेंथिल को 28 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
