जजों की नियुक्ति का मामला: सुप्रीम कोर्ट केंद्र से नाराज, कहा- ‘गंभीर फैसला लेने के लिए मत कीजिए मजबूर’

सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच तनातनी की खबरें आए दिन चर्चा में रहती है। एक बार फिर जजों की नियुक्ति के मुद्दे पर कार्यपालिका और न्यायपालिका आमने सामने है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम की सिफारिशों के बावजूद जजों की नियुक्ति में देरी को लेकर केंद्र सरकार को खूब लताड़ लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार हमें कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर ना करे। साथ ही कोर्ट ने जजों की नियुक्ति पर फैसला करने के लिए केंद्र सरकार को 5 दिन का समय दिया।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रवैया देख केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कहा कि हम रविवार तक फैसला कर लेंगे। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार कॉलेजियम की सिफारिशों पर फैसला कर रही है। इस पर जस्टिस कौल ने टिप्पणी की कि, ‘हम कर रहे हैं और हम करेंगे, दोनों में बहुत अंतर है’।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से नाराजगी जताते हुए कहा कि आपका रवैया ठीक नहीं है और हैरान करने वाला भी है। बेंच ने कहा- ‘हमारे द्वारा की गई सिफारिशों पर अब तक कोई अमल नहीं हुआ। जब हमें लगता है कि किसी जज की जरूरत हैं और उन्हें यहां लाना चाहिए तभी हम सिफारिश करते हैं, लेकिन आप उसे भी नजरअंदाज करते हैं और फाइल को लटकाए रखते हैं। ये बहुत ही गंभीर मसला है’।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,”हमने एजी के सामने रखा है कि ट्रांसफर प्रस्तावों में किसी भी तरह की देरी से न्यायिक और प्रशासनिक दोनों तरह की कार्रवाई हो सकती है, जो सुखद नहीं होगी।”

कोर्ट ने आदेश में आगे कहा,”अगर हम विचार के लिए लंबित मामलों की स्थिति को देखते हैं, तो सरकार के पास 11 मामले लंबित हैं, जिन्हें कॉलेजियम ने मंजूरी दे दी थी और अभी तक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं। इसका अर्थ ये है कि सरकार न तो नियुक्ति करती है और न ही नामों पर अपने रिजर्वेशन, अगर कोई हो, के बारे में सूचित करती है।”

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को इस मामले में एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु द्वारा लगाई गई एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा था। एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार का आचरण पीएलआर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड बनाम महानदी कोलफील्ड्स प्राइवेट लिमिटेड के मुद्दे पर कोर्ट के आदेश का घोर उल्लंघन है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि कॉलेजियम द्वारा दोहराए गए नामों को केंद्र द्वारा 3 से 4 सप्ताह के भीतर मंजूरी दी जानी चाहिए।

इस मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस ओक की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बीते 13 दिसंबर को 5 जजों के नामों की सिफारिश की थी। इन जजों में राजस्थान HC के चीफ जस्टिस- जस्टिस पंकज मिथल, पटना HC के चीफ जस्टिस- जस्टिस संजय करोल, मणिपुर HC के चीफ जस्टिस- जस्टिस पी वी संजय कुमार, पटना HC के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और इलाहाबाद HC के जस्टिस मनोज मिश्रा का नाम शामिल है।

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या 27 है जिसमें CJI भी शामिल हैं। इन पांचों जजों के शपथ के साथ कुल जजों की संख्या 32 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में जजों की सैंक्शन स्ट्रेंथ 34 है।

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