बिहार में मंगलवार को हुई महागठबंधन विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके बाद तेजस्वी यादव ही महागठबंधन का नेतृत्व करेंगे। नीतीश ने तेजस्वी की ओर इशारा करते हुए कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी को आगे करना है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि विधानसभा का चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इसके साथ ही नीतीश कुमार ने एकबार फिर कहा कि, ‘न तो मैं सीएम पद का उम्मीदवार बनना चाहता हूं न ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनना चाहता हूं’। उन्होंने कहा, बीजेपी को सभी विपक्ष की पार्टियां हटाना चाहती है। हमलोग भी इसी कोशिश में लगे हुए हैं।
नीतीश कुमार की अध्यक्षता में महागठबंधन की बैठक विधानसभा के सेंट्रल हॉल में हुई। जिसमें सदन की कार्यवाही को लेकर दिशा निर्देश जारी किया गया। सीएम ने महागठबंधन के सभी सदस्यों को मौजूद रहने का निर्देश दिया था। मीटिंग में जदयू, राजद, कांग्रेस, लेफ्ट सहित सभी पार्टियों के विधायकों और एमएलसी ने भाग लिया। बैठक के बाद नीतीश कुमार ने साफ तौर पर कहा कि 2025 विधानसभा का चुनाव उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
बीते दिनों भी गाहे-बगाहे नीतीश कुमार तेजस्वी यादव को आगे बढ़ाने की बात करते रहे हैं। सीएम नीतीश कुमार ने इससे पहले तेजस्वी को आगे बढ़ाने की बात नालंदा में कही थी। बीते सोमवार को वे डेंटल कॉलेज के उद्घाटन के मौके पर तेजस्वी यादव के साथ नालंदा गए थे। तेजस्वी यादव के जन्मदिन के मौके पर भी नीतीश ने सार्वजनिक रूप से उन्हें गले लगाते हुए कहा था- आगे सब इन्हें ही देखना है।
महागठबंधन की बैठक में शराबबंदी को लेकर भी चर्चा की गई। बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि शराबबंदी को लेकर कोई भी अनाप-शनाप बातें ना करें, क्योंकि सबके समर्थन से शराबबंदी हुई थी। उन्होंने कहा- हमने महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलते हुए बिहार में शराबबंदी लागू की। शराबबंदी नहीं थी तो बहुत झगड़ा-झंझट होता था। अब सब ठीक हो गया है और आगे भी सब ठीक होगा।
2005 से ही बिहार की सत्ता पर काबिज हैं नीतीश कुमार-
नीतीश कुमार ने 1977 मेंअपना पहला चुनाव नालंदा के हरनौत से लड़ा था। यहां से नीतीश कुमार चार बार चुनाव लड़े। जिसमें उन्हें 1977 और 1980 में हार मिली, जबकि 1985 और 1995 के चुनाव में वो विजयी रहे। नीतीश कुमार ने 2004 मेंअपना आखिरी चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें नालंदा से जीत हासिल हुई थी। उसके बाद से नीतीश कुमार ने कोई चुनाव नहीं लड़ा। नीतीश कुमार ने साल 1972 में बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की। उन्होंने कुछ समय तक बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में नौकरी भी की, लेकिन जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं के संपर्क में आने के बाद नीतीश कुमार राजनीति में आ गए। केंद्र में कई अहम मंत्रालय संभालने वाले नीतीश कुमार 2005 से बिहार की सत्ता पर काबिज हैं।
