UP Exclusive- स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के क्षेत्र सिद्धार्थनगर में कोरोना वैक्सीन की गलत डोज़ ग्रामीणों को लगी, BJP आदित्यनाथ के राज में “आदमी” राम भरोसे !

 

ऊत्तरप्रदेश में कोरोना के बढ़ते प्रकोप और कुप्रबंधन ने नये रिकार्ड्स बनाने में महारत हासिल करने की सोच ली है। ये मामला दिलचस्प इसलिए भी है क्योंकि उत्तरप्रदेश के कैबिनेट स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के खुद के गृह क्षेत्र का है, पूरे प्रदेश में कोरोना काल में उन्होंने क्या काम किया है ये तो सिर्फ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बता सकते है या जय प्रताप सिंह, इस बार की कोरोना लहर में सरकार की नकली कागज़ी कारवाई की पोल जरूर खोल कर रख दी है। दूसरी सरकार होती तो नैतिकता के नाम पर इस्तीफे हो चुके होते पर ये सरकार तो कहती है खुद पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह का कथन है हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते !!!

ताज़ा मामला सिद्धार्थनगर में कोविड19 वैक्‍सीनेशन में लापरवाही का आया है। 20 लोगों को पहली और दूसरी डोज में लगाईं गई कोविशिल्ड और दूसरी डोज़ में कोवैक्सीन वैक्‍सीन की डोज़ दे दी गई । गांव वालों को इस बात की जानकारी होते ही दहशत का माहौल बन गया है, पर अभी तक कोई दिक्कत सामने नहीं आई है।

 

ये पूरी घटना बढ़नी प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र की हैं-

यहां के गांव औदही कलां समेत एक अन्‍य गांव में लगभग 20 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज कोविशील्‍ड की लगाई गई। इसके बाद 14 मई को दूसरी डोज लगाते समय स्वास्थ्यकर्मियों ने भारी लापरवाही बरतते हुए कोवैक्‍सीन लगा दी। इस बात की जानकारी होते ही विभाग में हड़कंप मच गया। सब एक दूसरे पर इस गलती का आरोप लगाने लगे।

 

सीएमओ ने स्‍वीकार की लापरवाही !

विभागीय लापरवाही के इस मामले में सीएमओ संदीप चौधरी ने स्वीकार किया कि लगभग 20 लोगों को स्वास्थ्यकर्मियों ने लापरवाही बरतते हुए गलत वैक्सीन लगा दी है। हमारी टीम इन सभी लोगों पर नजर बनाए हुए है। अभी तक किसी व्यक्ति में कोई समस्या नही देखने को नहीं मिली है। इस गंभीर लापरवाही के लिए हमने जांच टीम बना दी है। रिपोर्ट आते ही जो भी दोषी कर्मचारी होंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 

तीन पर कार्रवाई की गाज गिरी है-

सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने बताया, लापरवाही बरतने वाली एएनएम कमलावती को निलंबित किया गया है। कोल्डचेन मेंटेन करने वाली प्रभारी आईओ शांति सिंह के खिलाफ वित्तिय वसूली और अधिक्षक डॉ एसके पटेल को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं, ऐसे मामलों पर

क्या प्रदेश में इस तरह की लापरवाही को नजरअंदाज किया जा सकता है ?? अभी तक देश में ऐसा कोई परीक्षण नहीं हुआ है, जिसके आधार पर टीकों की अदला-बदली संभव हो सके। डॉ मानते हैं कि इससे टीका लेने वालों को परेशानी हो सकती है।

 

छोटे स्तर पर मामलें को दबाने की पूरी कोशिश है, लेकिन क्या ये कारवाई उचित मानी जा सकती है। देश में कोरोना का संकट बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक लापरवाही के नए मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बढ़नी पीएचसी में सामने आया है। यहां ग्रामीणों को एक अप्रैल को कोविशील्ड का पहला टीका लगाया गया था। जबकि 13 मई को 20 लोगों को कोवाक्सिन का टीका लगा दिया गया। अब इस मामले के सामने आने के बाद जांच कर लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई करने की बात कही जा रही है।

ये तो सरासर प्रदेशके मुखिया और मंत्रियों की लापरवाही है, आश्चर्यजनक है कि प्रदेश में एभी तक तेज प्रताप सिंह से सवालों की शृंखला क्यों नहीं शुरू हुई, पूरा मंत्रिमंडल केवल प्रचार और प्रसार पर चल रहा है, हर जगह योगी आदित्यनाथ फीता काटने खुद पहुंचते है, क्या ये कदम कोरोना को रोकने में कारगर है या, जनता को जागरूक करके जल्द से जल्द वैक्सीन लगा कर उचित प्रबंधन करना है।

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