योगेश भारद्वाज: ऊत्तरप्रदेश में कोरोना जैसे एक्सरे मशीन बन कर आया हैं जिसके दायरे में आकर स्वास्थ्य विभाग की पोल खुलती दिख रही हैं। सवाल जायज़ है और समय कब हिसाब से जरूरी भी, क्योंकि गंगा में तैरती अनगिनत लाशों के अंबार और बिना ऑक्सीजन लोगों की टूटती सांसों की चीख पुकार एक ही बात कहती हैं, है अगर समय पर उचित प्रबंधन किया होता तो शायद लोगों की जान पर इतनी आफत नहीं आती। लेकिन इस बात की सुध कौन ले!!
स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह सिर्फ फीते काटने में व्यस्त है , सवाल तो स्वास्थ्य विभाग पर भी है। बिना विभाग के मिली भगत के ऐसा कांड कैसे हो गया। पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, ऐसे में इस तरह के घोटालें पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक है !
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान कितना बदल गया इंसान इस कहावत को मथुरा के स्वास्थ विभाग ने चरितार्थ कर दिया।
दरसल मथुरा जनपद को पीएम केयर्स फंड के तहत पिछले वर्ष 13 वेंटिलेटर दिए गए थे ऐसा जिला प्रशासन का कहना है। मथुरा आए वेंटिलेटर भ्रस्टाचार और मिलीभगत के चलते तत्कालीन जिलाधिकारी व सीएमओ द्वारा मथुरा के बड़े रईश रामकिशोर अग्रवाल के निजी अस्पतालों को दे दिए गए। KD हॉस्पिटल बड़े आराम से अपना धंधा चमकाने के लिए इसका प्रयोग कर रहा था, कुछ दिनों पहले भी इस अस्पताल का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें पैसे पहले जमा करने को कहा जा रहा था। एक और मामला यहाँ का है जिसमें मरीज के परिजनों से पैसों की डिमांड की गई थी, बाद में मरीज की मौत हो गई। इस मामलें पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने जांच भी बिठाई है।
इस मामलें का खुलासा होने पर सपा ने कड़ी आपत्ति दर्ज की हैं। स्थानीय सपा नेता प्रदीप चौधरी द्वारा कार्रवाई करने की मांग जिला प्रशासन से की गयी है। चौधरी ने मांग की हैं इस मामलें में दोषियों पर कारवाई होनी चाहिए।
प्रदीप का ये भी कहना है कि पीएम केयर फण्ड से 13 नही बल्कि 20 वेंटिलेटर मथुरा आये थे, जिनमें से 19 निजी अस्पतालों को और केवल 1 वेंटिलेटर 100 बेड वाले अस्पताल को दिया गया। 13 वेंटिलेटर KD हॉस्पिटल, 2 KD मेडिकल, 2 KN मेडिकल, 2 स्वर्णजयंती हॉस्पिटल व 2 रामकिशन मिशन वृन्दावन को दिए गए थे। ये सरासर जनता के साथ धोखा है और लापरवाही। बिना भाजपा के नेताओं के मिलीभगत के ऐसा कैसे संभव है।
मथुरा से फ़िल्म स्टार हेमामालिनी सांसद है और और ऊत्तरप्रदेश के ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा विधायक हैं। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह विधायक ठा. कारिंदा सिंह विधायक पूरन प्रकाश, है इन सबकी नाक के नीचे इतना बड़ा भ्रस्टाचार हो कैसे गया ??? जनता को मिलने वाली सुविधा निजी अस्पताल को कैसे दे दी गयी यह प्रकरण सिस्टम व जिला प्रशासन पर सवालिया निशान लगता है !
पीएम केयर्स फंड से मथुरा आए वेंटीलेटरो के विषय मे वर्तमान सीएमओ का साफ कहना है कि वह तत्कालीन सीएमओ द्वारा एक निजी मेडिकल कॉलेज को दे दिए गए थे। अब जब कलई खुल गयी तो हड़बड़ाहट में यह 13 वेंटिलेटर तत्काल वापस लिए जाएं ऐसा कहा जा रहा है। वेंटीलेटर के अभाव में जो लोग मर गये उनकी मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा ???
अब सबसे बड़ा सवाल ये है ?? आखिर पीएम केयर फंड और अन्य फंडों से मंगाए गए 13 वेंटिलेटर को KD मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को क्यों दिया गया। सरकारी अस्पतालों में इसको क्यों नहीं दिया गया जो जिला प्रशासन के अधीन आते हैं।
आपको बता दें की जिस केडी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को 13 वेंटीलेटर दिए गए थे उसी हॉस्पिटल द्वारा कोरोना मरीजो के परिजनों ने लाखों रुपए की बसूली करने का आरोप लगाया है जिसकी जांच डीएम ने जनपद में तैनात आईएएस दीक्षा जैन को दी है। जिसकी जांच अभी जारी है। जिसकी अवैध वसूली की जांच चल रही है, क्यों उस पर अधिकारियों की मेहरबानी हुई। देखा जाये तो इतना बड़ा कदम कोई अधिकारी बिना किसी नेता के इशारे के नहीं कर सकता।
