TET परीक्षा पेपर लीक मामले में सरकार का बड़ा एक्शन, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी गिरफ्तार

प्रयागराज: शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी में बड़े पैमाने हुई गड़बड़ी को इस बार सरकार ने उसे गम्भीरता से लिया है। चुनाव नजदीक होने के कारण और परीक्षा रद्द होने से बेरोजगारों की नाराजगी को देखते हुए सरकार कुछ ठोस नतीजे पर पहुंचना चाहती है।भर्ती परीक्षाओं में नकल माफिया के तिलिस्म को सरकार तोड़ना चाहती है। इस लिए सीएम योगी ने अधिकारियों को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने तो आरोपियों की सम्पत्ति जब्त करने और बुलडोजर चलवाने तक की बात की है।इसी कड़ी में टीईटी 2021 का पेपर लीक होने के मामले में बड़ी कार्रवाई के तहत एसटीएफ ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव संजय कुमार उपाध्याय को प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया है।
उन्हें मंगलवार को निलंबित किया गया था।इस तरह देखें तो शिक्षक पात्रता परीक्षा का पेपर आउट होने के मामले में निलंबित किए गए सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय कुमार उपाध्याय की कुर्सी महज पांच माह में ही चली गई और उनको जेल भी जाना पड़ा।बताया जाता है कि टीईटी का प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।कहां जा रहा है कि एजेंसी चयन में हुई चूक का खामियाजा सचिव को भुगतना पड़ा। इससे पूर्व 2018 में 68,500 शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी मिलने पर तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी सुत्ता सिंह को भी निलंबित किया गया था।
 उधर एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने कहा कि पेपर लीक मामले में कोई भी आरोपी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में कुल 34 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनके पास से मिले दस्तावेज़ों से साफ हो गया है कि ये प्रश्नपत्र परीक्षा में आने वाले थे। जिस फर्म को टीईटी के प्रश्न पत्र छापने की जिम्मेदारी मिली थी, उसके मालिक को भी गिरफ्तार किया गया है। इसी कड़ी में सुराग मिलने पर टीईटी 2021 के परीक्षा नियंत्रक व सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकरण संजय कुमार उपाध्याय को भी गिरफ्तार किया गया। जानकारी के मुताबिक पूछताछ में पता चला कि प्रश्नपत्र लीक कराने में इनकी संलिप्तता थी।याद रहे कि पूर्व  में यूपी एसटीएफ ने प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी आर.एस.एम. फिनसर्व लिमिटेड के निदेशक राय अनूप प्रसाद को भी गिरफ्तार किया है। इस एजेंसी को प्रश्न पत्र छापने का वर्क आर्डर संजय उपाध्याय ने जारी किया था। बताया जाता है कि सरकार ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी को इस पूरे मामले में प्रथम दृष्टया दोषी माना है।
सरकार का मानना है कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभाई और एक गैर जिम्मेदार एजेंसी आर.एस.एम. फिनसर्व लिमिटेड को पेपर छापने की जिम्मेदारी सौंप दी गई।

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