वाराणसी: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में विगत 4 सालों में ऐसा माहौल बनाया गया है, जहां चमचों का एक गिरोह बुरी तरह से आधिकारिक कामकाज में हावी है, और मनमाने ढंग से अवैध वसूली और उगाही में लिप्त है, ऐसे लोगों को पूर्व कुलपति प्रो. त्रिलोकी नाथ सिंह और रजिस्ट्रार साहब लाल मौर्य के कारण खूब हवा मिली हुई है। ऐसा ही मनमानी का एक उदाहरण योग दिवस पर देखने को मिला। बिना झिझक प्रोटोकॉल को तोड़ा डॉ के. के. सिंह ने-
गौरतलब है कि त्रिलोकीनाथ सिंह के कार्यकाल खत्म होने बाद रज्जू भैया विश्विद्यालय के मौजूदा कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह को कार्यवाहक कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ बनाया गया है। इस नाते जब तक नये अधिकृत कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी अपना कार्य नहीं ग्रहण कर लेते तब तक प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ही कुलपति के तौर पर कैंपस के कार्यक्रम और प्रचार का हिस्सा होंगे। संभवत प्रो. आनंद कुमार कल अपना कार्य ग्रहण करेंगे।
लेकिन उनके पास पहुंचने की कोशिश में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयोजक डॉ के के सिंह ने नया ही कीर्तिमान बना डाला। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उन्होंने योग प्रतियोगिता आयोजन से संबंधित एक पोस्ट जारी करके प्रो. अखिलेश की जगह प्रो. आनंद कुमार त्यागी को कुलपति बना डाला। संवैधानिक रूप से ये प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। नियमानुसार कुलपति कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही विश्वविद्यालय के नाम और काम के लिए अधिग्रहीत होंगे।
देखा जाये तो प्रो. अखिलेश कुमार सिंह कार्यवाहक कुलपति हैं, ऐसे में प्रो. आनंद कुमार त्यागी का नाम कैसे इस्तेमाल में लाया जा सकता है। विश्विद्यालय के प्रोटोकॉल में ये अनुशासनहीनता का मामला हैं। और इसके लिए डॉ के.के. सिंह को दंडित किया जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय परिसर में इस पोस्टर की काफी चर्चा है।विश्वविद्यालय के शिक्षकों में इस तरह के पोस्टर से काफी नाराजगी है।


