हिमाचल प्रदेश में जंगल में आग लगने की 25 नई घटनाएं सामने आईं है, जिसके बाद इस गर्मी के मौसम में अब तक ऐसी आग लगने की घटनाओं की संख्या बढ़कर 1,033 हो गई है। अधिकारीयों ने बताया कि करीब तीन करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। सहायक मुख्य वन संरक्षक पीके राणा ने कहा कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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पीके राणा ने कहा, ”इस फायर सीजन में आग के लगभग 1033 मामले सामने आए हैं और हम उन पर अच्छी तरह से काबू पाने में सफल रहे हैं। वर्तमान में, राज्य के विभिन्न हिस्सों में 25 जंगल की आग सक्रिय हैं और हमारा विभाग राज्य में आग का मौसम 15 अप्रैल से 30 जून तक रहता है। हम पहले ही 8000 हेक्टेयर जमीन पर कंट्रोल बर्निंग कर चुके हैं। फायर सीजन से पहले हमने जागरूकता पैदा करने के लिए लोगों के साथ कम से कम 900 सार्वजनिक बैठकें की थीं। कई जगहों पर लोग हमारी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। संयुक्त वन प्रबंधन समितियाँ और महिलाओं के समूह जंगल की आग को नियंत्रित करने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। हमारे मुख्य सचिव ने राज्य के विभिन्न विभागों के साथ बैठक की। हमारी एनडीएमए के साथ भी बैठक हुई और उन्होंने कहा कि मानसून पश्चिम की ओर लौट रहा है, जिसके कारण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को सूखे का सामना करना पड़ रहा है।”
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उन्होंने बताया, ”हमारे पास 3,000 से अधिक स्थानीय फील्ड अधिकारी हैं और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 18,000 स्वयंसेवक मदद प्रदान कर रहे हैं और ‘आपदा मित्र’ (आपदा प्रतिक्रिया के लिए स्वयंसेवक) भी आगे आए हैं।
राणा ने कहा, “अब तक 38 एफआईआर दर्ज की गई हैं और अपराधियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए पुलिस को 600 शिकायतें दी गई हैं, और हमने आम जनता से भी कहा है कि अगर वे किसी को जंगलों में आग जलाते हुए देखते हैं तो तस्वीरें और वीडियो साझा करें।”
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हिमाचल प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजीव कुमार ने जंगल में आग की घटनाओं के लिए राज्य में चल रही लू की स्थिति के कारण तापमान में वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि जंगल में जलती सिगरेट फेंकने और विभिन्न उद्देश्यों के लिए आग जलाने जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण भी बड़ी संख्या में आग लगती है, उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बुधवार को सामने आई 25 घटनाओं में से एक आग की घटना सोलन जिले के धरमपुर में सामने आई, जिसमें आग एक इमारत तक फैल गई, जिससे लाखों का नुकसान होने का अनुमान है।
आग सुबह करीब 11.30 बजे जंगलों में लगी जहां से यह पास के एक घर तक पहुंच गई, जहां एक कार वर्कशॉप भी थी।
एक अन्य घटना में, बिलासपुर के श्री नैना देवी में जंगल की आग से सड़क किनारे खड़े दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ये वाहन स्थानीय पुजारी विकास शर्मा और विशाल शर्मा के थे।
हिमाचल में कुल 2,026 वन बीट हैं, जिनमें से 339 ‘बहुत संवेदनशील’, 667 ‘संवेदनशील’ और 1,020 जंगल की आग के प्रति ‘कम संवेदनशील’ हैं।
शिमला, सोलन, बिलासपुर, मंडी और कांगड़ा जिलों में बार-बार आग लगने की घटनाएं देखी गईं हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में आग से लड़ते हुए 13 लोगों की मौत हो चुकी है।

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