‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की सालगिरह पर पीएम मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना; विपक्ष ने किया पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को विपक्ष पर स्पष्ट प्रहार किया। महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए भारत छोड़ो आंदोलन को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत अब भ्रष्टाचार, वंशवाद और तुष्टिकरण के खिलाफ एक स्वर में बोल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को इसी तर्ज पर देश भर में कार्यक्रम आयोजित किया।

पीएम ने एक ट्वीट में कहा, “भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले महान लोगों को श्रद्धांजलि। गांधी जी के नेतृत्व में इस आंदोलन ने भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने में प्रमुख भूमिका निभाई।”

उन्होंने कहा, “आज भारत एक स्वर में कह रहा है: भ्रष्टाचार भारत छोड़ो। वंशवाद भारत छोड़ो। तुष्टीकरण भारत छोड़ो।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, “आज ही के दिन महात्मा गांधी ने 1942 में अंग्रेज़ों भारत छोड़ो का नारा दिया था और QUIT INDIA मूवमेंट की शुरुआत हुई। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया है जिसमें तीन बातें कही गई हैं- परिवारवाद भारत छोड़ो, भ्रष्टाचार भारत छोड़ो और तुष्टिकरण भारत छोड़ो। अगर देश के लोकतांत्रिक अस्तित्व को बचाना है तो इन तीनों को भारत छोड़ना होगा।”

इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, “भाजपा और भारत छोड़ो के बीच क्या संबंध है? उनके लोगों ने आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया था…इसका क्या मतलब है कि वे भारत छोड़ो दिवस पर कुछ कह रहे हैं? यह एक ऐतिहासिक दिन है…हम PM मोदी की मौजूदगी में संसद में बहस की मांग कर रहे हैं। PM संसद में आ ही नहीं रहे हैं…वे मणिपुर के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। अब भारत छोड़ो आंदोलन हमें इस सरकार की याद दिलाता है…”

विपक्षी सांसदों ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन को याद करते हुए संसद परिसर में महात्मा गांधी को पुष्पांजलि भी अर्पित की।

भाजपा सांसदों ने भी संसद परिसर में ‘भ्रष्टाचार भारत छोड़ो’, ‘परिवारवाद भारत छोड़ो’ और ‘तुष्टिकरण भारत छोड़ो’ तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि इन 75 सालों में कांग्रेस और उनके समर्थन वाली पार्टियों ने देश को तीन चीजें दीं जो देश को दीमक की तरह खा रही हैं। एक है वंशवाद…दूसरा है भ्रष्टाचार… तीसरा है तुष्टीकरण… अल्पसंख्यकों को गुमराह करके वोट बैंक की राजनीति हो रही है और वे देश में नीतियों को लागू नहीं होने दे रहे।

भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा कि 65 साल इन लोगों का शासन रहा, उसमें सारे वंशवादी रहे, परिवारवादी रहे। हमें भी भ्रमित करते रहे, लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी आए, 2014 के बाद पता चला कि हज़ारों-लाखों करोड़ रुपए गायब हो जाते थे। गांव, गरीब, किसान, दलित, वंचित, शोषित आज तरक्की कर रहा है…आज समस्त भाजपा और पूरा भारत कह रहा है- हे घमंडिया, छोड़ो इंडिया।

वहीं भाजपा सांसद एसएस अहलूवालिया ने कहा, “क्विट इंडिया मूवमेंट के 5 वर्ष के बाद देश आज़ाद हुआ और उसके बाद राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं बनी लेकिन कुछ ही समय बाद इसमें भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और परिवारवाद का घुन लग गया। इसके कारण राष्ट्र में जो सामाजिक न्याय होना चाहिए था वह नहीं हुआ। हमें आज फिर से क्विट इंडिया की तर्ज पर शपथ लेने की ज़रूरत है।”

बता दें की पीएम मोदी ने बार-बार विपक्षी दलों पर भ्रष्टाचार, वंशवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है और लोगों से उनसे दूर रहने का आह्वान किया है। इससे पहले मंगलवार को पीएम ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे अपनी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अपने ही गठबंधन के सदस्यों के एक-दूसरे के प्रति विश्वास को परखने के लिए लाए हैं क्योंकि इंडिया ब्लॉक अपने घटकों के बीच अविश्वास से चिह्नित है।

“भारत छोड़ो आंदोलन” 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी द्वारा शुरू किया गया था। यह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के बॉम्बे सत्र में शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण आंदोलन था जहां गांधी ने भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने के उद्देश्य से ‘करो या मरो’ का आह्वान किया था।इस आंदोलन ने अंग्रेजों के खिलाफ व्यापक सविनय अवज्ञा, विचलन के कृत्यों और असहयोग की शुरुआत की। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर सरकारी ढांचों को ध्वस्त कर दिया। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू सहित कई शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। 1942 के अंत तक 60,000 से अधिक लोगों को जेल में डाल दिया गया और सैकड़ों लोग मारे गये।

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