पटना: महाबैठक में पार्टियों के बीच कोई आम सहमति नहीं बनी, शिमला में फिर होगी बैठक; अमित शाह ने बताया ‘फोटो सेशन’

2024 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा विरोधी मोर्चे के गठन की रूपरेखा तैयार करने के लिए शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मेजबानी में विपक्ष की एक बड़ी बैठक पटना में हुई है। बैठक में 15 राजनीतिक दलों ने भाग लिया जिनमें कांग्रेस, आप, एनसीपी, टीएमसी और अन्य शामिल हैं। पटना में विपक्ष की बैठक के बाद शिमला में इस बैठक का एक और चरण होगा। इस विपक्षी एकजुटता का संयोजक कौन होगा, इस बारे में फैसला शिमला में ही किया जाएगा।

बैठक के बाद विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “मल्लिकार्जुन खड़गे जल्द ही एक और विपक्षी बैठक की अध्यक्षता करेंगे।” कुमार का कहना है कि 17 पार्टियों ने 2024 का लोकसभा चुनाव एक साथ लड़ने का फैसला किया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि विपक्षी दलों की अगली मीटिंग 12 जुलाई को होगी। वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई है। BJP और RSS आक्रमण कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि इस वक्त हिंदुस्तान की नींव पर आक्रमण हो रहा है। हमारे बीच कुछ मतभेद हो सकते हैं लेकिन हमने अपनी विचारधारा की रक्षा के लिए साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ”पटना में जो शुरू होता है वह जन आंदोलन बन जाता है।” उन्होंने कहा, “हमें विपक्षी मत कहिए. हम भी देश के नागरिक हैं।” बनर्जी ने कहा, ‘आज 17 विपक्षी दलों की बैठक हुई, जिसमें कई सीएम और पूर्व सीएम भी शामिल हैं। हम भाजपा शासन को खत्म करने के लक्ष्य के साथ मिलकर लड़ेंगे। हम सभी एकजुट हैं और भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे।’

विपक्ष की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल शामिल नहीं हुए। आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा, ‘कांग्रेस को छोड़कर अन्य सभी 11 दलों, जिनका राज्यसभा में प्रतिनिधित्व है, ने दिल्ली सरकार पर केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ स्पष्ट रूप से अपना रुख व्यक्त किया है और घोषणा की है कि वे राज्यसभा में इसका विरोध करेंगे। कांग्रेस ने अभी तक इस अध्यादेश पर अपना रुख सार्वजनिक नहीं किया है। कांग्रेस की चुप्पी उसके वास्तविक इरादों पर संदेह पैदा करती है।‘

प्रेस कांफ्रेंस में शरद पवार ने कहा कि आपसी मतभेद छोड़कर आगे बढ़ेंगे। तो वहीं महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम गांधी के इस देश को गोडसे का मुल्क नहीं बनने देंगे।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम देश को बचाने के लिए एक साथ आए हैं। ठाकरे ने यह भी कहा कि शुरुआत अच्छी होती है तो आगे सब अच्छा ही होता है। उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि तानाशाही करने वालों के विरोध में रहेंगे।

विपक्षी एकजुटता बैठक में सभी नेताओं ने अपनी-अपनी बात रखी। सूत्रों के मुताबिक AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली अध्यादेश पर सबका साथ मांगा। वहीं इस मामले में उद्धव ठाकरे समेत कई अन्य नेताओं कांग्रेस से अध्यादेश पर समर्थन देने की अपील की। बैठक में एक मौका ऐसा भी आया जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने केजरीवाल को असहज कर दिया। उन्होंने अनुच्छेद 370 पर केजरीवाल का स्टैंड साफ नहीं रहने की याद दिला दी। बैठक में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाने की चर्चा हुई। इसे अलावा सभी दल बीजेपी को 2024 रोकने के लिए सहमत दिखे। विपक्षी गठबंधन के लिए किसी को संयोजक बनाने की आवश्यकता जताई गई।

इस बैठक में कांग्रेस और AAP के मनमुटाव को दूर करने के लिए एनसीपी चीफ शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने हस्तक्षेप किया। दोनों नेताओं ने कहा- एकसाथ आना होगा और आपसी मतभेद दूर करने होंगे। शरद पवार ने इस दौरान एनसीपी (स्वयं) और उद्धव ठाकरे का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा, “हम पिछले 25 वर्षों से एक-दूसरे की आलोचना कर रहे थे, लेकिन हमने हर मतभेद को एक तरफ रख दिया और अब हम एक साथ काम कर रहे हैं। ” वहीं उद्धव ठाकरे ने भी कहा, अब समय आ गया है कि मतभेद भुलाकर एक साथ आएं।

महाबैठक में राहुल गांधी ने कहा कि हमें विपक्षी एकजुटता बहुत जरूरी है। साफ दिल से विपक्ष एकजुट हो। आमने-सामने साफ-साफ बात हो, यह नहीं कि अंदर कुछ और बाहर कुछ और कहा जाए।

बैठक में बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बंगाल में कांग्रेस के रवैये पर आपत्ति जताई। ममता बनर्जी ने कहा, “हर किसी को बड़ा दिल दिखाना होगा। अगर वे आपस में लड़ेंगे तो बीजेपी को फायदा होगा।”

विरोधी दलों की बैठक के बीच कांग्रेस सांसद और बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, साफ-साफ सुन लीजिए। पश्चिम बंगाल में ममता की जी हुजूरी कर कांग्रेस ने कभी राजनीति नहीं की है और ना करेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि तृणमूल कांग्रेस चोरों की पार्टी है।

विपक्षी दलों की महाबैठक में आज 15 दलों के 27 नेता शामिल हुए। इन नेताओं में नीतीश कुमार (जेडीयू), ममता बनर्जी (एआईटीसी), एमके स्टालिन (डीएमके), मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस), राहुल गांधी (कांग्रेस), अरविंद केजरीवाल (आप), हेमंत सोरेन (झामुमो), उद्धव ठाकरे (एसएस-यूबीटी), शरद पवार (एनसीपी), लालू प्रसाद यादव (राजद), भगवंत मान (आप), अखिलेश यादव (सपा), केसी वेणुगोपाल (कांग्रेस), सुप्रिया सुले (एनसीपी), मनोज झा (राजद), फिरहाद हकीम (एआईटीसी), प्रफुल्ल पटेल (एनसीपी), राघव चड्ढा (आप), संजय सिंह (आप), संजय राऊत (एसएस-यूबीटी), ललन सिंह (जेडीयू),संजय झा (राजद), सीताराम येचुरी (सीपीआईएम), उमर अब्दुल्ला (नेकां), टीआर बालू (डीएमके), महबूबा मुफ्ती (पीडीपी), दीपंकर भट्टाचार्य (सीपीआईएमएल)तेजस्वी यादव (राजद), अभिषेक बनर्जी (एआईटीसी), डेरेक ओ’ब्रायन (एआईटीसी), आदित्य ठाकरे (एसएस-यूबीटी) और डी राजा (सीपीआई) का नाम शामिल है।

JDU ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पोस्टर जारी किया। इसके साथ ही उसने लिखा- ये दलों का नहीं दिलों का महागठबंधन। इस पोस्टर में नीतीश कुमार की फोटो को सभी नेताओं की तुलना में काफी बड़ा दिखाया गया है।

2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा विरोधी मोर्चे के गठन की रूपरेखा तैयार करने के लिए पटना में चल रही विपक्षी नेताओं की बैठक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भाजपा के जेपी नड्डा ने कहा कि जिन नेताओं को पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने जेल भेजा था वो राहुल गांधी का स्वागत कर रहे हैं। नड्डा ने कहा, आज मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ… ये विपक्षी बिहार में गलबहियां कर रहे हैं, लेकिन ये भूल गए कि लालू प्रसाद यादव को राहुल गांधी की दादी ने 22 महीने के लिए जेल में डाला था। नीतीश कुमार 20 महीने के लिए जेल की सलाखों के पीछे थे। आज पटना की धरती पर जब मैं राहुल गांधी का स्वागत करते हुए इनकी तस्वीरें देखता हूं तो लगता कि राजनीति में क्या से क्या हो गया।

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, ‘उद्धव ठाकरे के पिता हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे कहा करते थे कि मैं शिवसेना को कांग्रेस नहीं बनने दूंगा। अगर मुझे कांग्रेस से हाथ मिलाना पड़े तो मैं अपनी दुकान बंद कर दूंगा। आज बाला साहेब ठाकरे सोचते होंगे कि उनके बेटे ने ही शिवसेना की दुकान बंद कर दी है।’

विपक्षी एकजुटता बैठक को लेकर बीजेपी ने पोस्टर के जरिये कांग्रेस पर तंज कसा। बीजेपी के इस पोस्टर में देवदास वाले शाहरुख खान के साथ राहुल गांधी की तस्वीर दिखी और इसमें फिल्म के डायलॉग और उसका एडिट वर्जन लिखा गया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू से विपक्षी दलों की बैठक पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि आज पटना में एक फोटो सेशन चल रहा है। सारे विपक्ष के नेता एक मंच पर आ रहे हैं। वे संदेश देना चाहते हैं कि हम बीजेपी और मोदी जी को चुनौती देंगे। मैं विपक्ष के नेताओं को कहना चाहता हूं कि कितने भी हाथ मिला लो आप एक साथ नहीं आ सकते हैं। आ भी गए तो 2024 में मोदीजी का 300 से ज्यादा सीटों के साथ आना तय है।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने विपक्षी दलों की महाबैठक को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मैं विशेष रूप से कांग्रेस को सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करने के लिए धन्यवाद देती हूं कि वह अकेले पीएम नरेंद्र मोदी को नहीं हरा सकते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें दूसरों के समर्थन की आवश्यकता है।”

बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने विपक्षी दलों की बैठक पर तंज कसते हुए कहा- “यह ‘ठगों का गठबंधन’ है। वे देश को मूर्ख बनाने की तैयारी कर रहे हैं. उनके पास कोई सिद्धांत या नीति नहीं है। सभी भ्रष्टाचार में शामिल हैं।”

बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने कहा, ‘ इस बैठक का कोई फल नहीं निकलने वाला है। चाय के लिए एक साथ बैठने का मतलब यह नहीं है कि विपक्ष एकजुट है। सवाल यह है कि क्या बंगाल में ममता कांग्रेस के लिए सीट छोड़ेंगी। ममता तो कह रही हैं कि कांग्रेस बंगाल छोड़ो। क्यों कांग्रेस बंगाल छोड़ देगी या दिल्ली और पंजाब केजरीवाल को दे देगी जबकि बैठक से पहले ही केजरीवाल ब्लैकमेल कर रहे हैं कि मेरे एजेंडे पर पहले चर्चा हो।’

बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने ट्वीट किया- महागठबंधन का ड्रामा ऐसा है जैसे बिना दूल्हे की बारात। क्या आप जानते हैं, विपक्षी एकता की बैठक का टैगलाइन क्या है? “खूब जमेगा रंग, जब मिल बैठेंगे ठगबंधन के भ्रष्टाचारी संग!” देश की जनता को ये बताने में आखिर इन्हें कैसी शर्म कि कौन है वो भ्रष्टाचारी जो 2024 में मोदी जी से टक्कर लेने वाला है। उन्होंने आगे लिखा- “भारत का सभी भ्रष्टाचारी कुनबा एक हो चुका है। सभी की इच्छा प्रधानमंत्री बनने की है। क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर हम मुख्यमंत्री बन कर 20 -25 हजार करोड़ कमा सकते हैं तो प्रधानमंत्री बनके कितने लाख करोड़ कमाएंगे। इसी उम्मीद में सब सोच रहे हैं कि पहले मोदी हटाओ फिर मैं तो सेटिंग करके प्रधानमंत्री बन ही जाऊंगा। भारत के विकास के बारे में एक शब्द चर्चा नहीं है। प्रधानमंत्री किसको बनाना है इस पर कोई चर्चा नहीं होगी। एजेंडा केवल एक है कि किसी तरह सारी जांच एजेंसियां हमारे दायरे में आ जाएं जिससे कि हम खुलकर भ्रष्टाचार कर सकें।”

केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्षी दलों की बैठक को लेकर कहा कि पीएम पद के लिए कई दावेदार हैं। विपक्ष मिलकर लड़े या न लड़े, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 2024 में जनता पीएम मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाएगी।

वहीं तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने विपक्ष की बैठक को “फासीवादी और निरंकुश शासन” के खिलाफ “युद्ध घोष” करार दिया है। द्रमुक प्रमुख अपने यह बयान बैठक में शामिल होने से पहले दिया। उन्होंने कहा, “कोई आश्चर्य नहीं कि सामाजिक न्याय की भूमि से इस फासीवादी, निरंकुश शासन को खत्म करने और एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक भारत के पुनर्जन्म के लिए एकजुट विपक्ष हो रहा है।”

विपक्ष की बैठक पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘उस बैठक में शिवसेना है, क्या वे सेक्युलर हो गए हैं? उस बैठक में दिल्ली के CM हैं। उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का भाजपा का समर्थन किया था। उस बैठक में नीतीश कुमार हैं जो NDA के तरफ से मुख्यमंत्री रहे हैं… हम भी नहीं चाहते के 2024 में देश के प्रधानमंत्री मोदी बने लेकिन इन पार्टियों का ट्रैक रिकॉर्ड क्या है? कांग्रेस आगे रहना चाहती है, नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने का ख़्वाब देख रहे हैं।’

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि अभी एक साल पहले जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहा था तो नीतीश कुमार ने मेरा टेलीफोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। आज वह विपक्षी एकता की मशाल वाहक हैं। हृदय परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण 12 महीने।

बता दें कि विपक्षी पार्टियों की इस बैठक की मेजबानी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने की। बैठक को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा से मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों के एक साथ आने के शुरुआती बिंदु के रूप में देखा जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *