एनसीपी नेता मोहम्मद फैजल की लोकसभा सदस्यता बुधवार को संसद के निचले सदन ने बहाल कर दी। मोहम्मद फैजल को इस साल जनवरी में 10 साल की जेल की सजा के साथ एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सदन से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। फैजल लक्षद्वीप का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय का रुख किया था। 25 जनवरी को केरल हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी थी।
सांसद मोहम्मद फैजल की संसद सदस्यता बहाल करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई भी हुई। लेकिन इससे पहले ही लोकसभा ने मोहम्मद फैजल की संसद सदस्यता बहाल कर दी। फैजल ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने लोकसभा से अपनी अयोग्यता को रद्द करने की मांग करते हुए कहा था कि केरल हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास के मामले में उनकी सजा पर रोक लगा दी है।
सांसदी वापस मिलने के बाद मोहम्मद फैजल ने कहा कि, “मेरी सदस्यता बहाल करने में हुई देरी सराहना करने योग्य नहीं है। सचिवालय ने मुझे अयोग्य घोषित करने का निर्णय लिया, अगले ही दिन मेरी सजा घोषित कर दी गई, कम से कम मेरी सदस्यता को रद्द करने के लिए तेजी दिखानी चाहिए थी”।
एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने कहा, “केरल उच्च न्यायालय द्वारा 25 जनवरी को उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने के आदेश के तुरंत बाद अयोग्यता को रद्द कर दिया जाना चाहिए था, हालांकि यह एक स्वागत योग्य कदम है।”
यहां ये जानना जरूरी है कि बीते दिनों ऐसा ही कुछ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ भी हुआ है। उनकी भी सदस्यता रद्द कर दी गई है। अगर उन्होंने ऊपरी कोर्ट में अपील की और कोर्ट से उन्हें राहत मिल जाती है तो उनकी भी सदस्यता बहाल हो सकती है।
आज सुप्रीम कोर्ट ने भी लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल की याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट को बताया गया कि चूंकि आज लोकसभा सचिवालय ने नोटिफिकेशन जारी कर फैज़ल की सदन की सदस्यता बहाल कर दी है, इसलिए अब इस याचिका पर सुनवाई की ज़रूरत नहीं है।
बता दें कि फैजल को 13 जनवरी को लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, जब 11 जनवरी को उन्हें और तीन अन्य को 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक मामले में 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। फैजल को उसके बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया था। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने 30 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मुलाकात की थी और उनसे लक्षद्वीप से दो बार के सदस्य फैजल के निलंबन को रद्द करने का अनुरोध किया था।
फैज़ल की अयोग्यता के बाद, चुनाव आयोग ने 18 जनवरी को लक्षद्वीप संसदीय सीट पर उपचुनाव की घोषणा की थी। हालांकि 30 जनवरी को, आयोग ने केरल हाई कोर्ट के फैसले के बाद उपचुनाव को रोकने का फैसला किया।
नियम कहता है कि अगर किसी सांसद या विधायक को दो या उससे ज्यादा की सजा होती है तो उसकी विधानसभा से सदस्यता भी रद्द हो जाती है।
