सीएम ममता का पीएम मोदी को पत्र, सख्त ‘बलात्कार विरोधी कानून’ लाने की उठाई मांग

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बलात्कार के मामलों पर सख्त कानून बनाने की मांग की है। यह घटनाक्रम कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ भयावह बलात्कार और हत्या पर जनता के गुस्से के बीच आया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार को बलात्कार-हत्या मामले और उसके बाद आरजी कर अस्पताल में हुई बर्बरता पर तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता बलात्कार मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह “समझने में असमर्थ” है कि राज्य सरकार अस्पताल में “बर्बरता के मुद्दे को संभालने” में कैसे सक्षम नहीं थी।

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि रेप के हर मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट पर तेज सुनवाई हो। रेप के हर केस में 15 दिन के भीतर ट्रायल पूरा हो जाए।

बनर्जी ने पत्र में लिखा, “मैं आपके ध्यान में लाना चाहती हूं कि देश भर में बलात्कार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई मामलों में बलात्कार के साथ हत्या भी की जाती है। यह देखना भयावह है कि देश भर में प्रतिदिन लगभग 90 बलात्कार के मामले होते हैं। इससे समाज और राष्ट्र का विश्वास और विवेक डगमगाता है। हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम इसे समाप्त करें ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस करें। ऐसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को कठोर केंद्रीय कानून के माध्यम से व्यापक तरीके से संबोधित करने की आवश्यकता है, जिसमें ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कठोर सजा का प्रावधान हो। ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना पर भी प्रस्तावित कानून में विचार किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में सुनवाई अधिमानतः 15 दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए।”

अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मांगों की चिट्ठी लिखकर ममता सरकार उन सवालों को लिफाफे में बंद कर देना चाहती है, जो सुप्रीम कोर्ट से लेकर कोलकाता की सड़कों तक पर पूछे जा रहे हैं?

इससे पहले ममता ने अपनी ओर से आरजी कर अस्पताल में हुई बर्बरता के लिए भाजपा और वाम दलों (राम और बम) को जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि उन्होंने बलात्कार मामले में सबूत नष्ट करने का प्रयास किया। ट्रेनी डॉक्टर के साथ अस्पताल के सेमिनार हॉल में बलात्कार किया गया था और उसका शव 9 अगस्त को मिला था। घटना के एक दिन बाद, ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार अपराधी के लिए मृत्युदंड की मांग करेगी।

उन्होंने पुलिस को यह भी चेतावनी दी थी कि अगर वे 18 अगस्त तक मामले को सुलझाने में असफल रहे तो जांच सीबीआई को सौंप दी जाएगी।

हालाँकि, 13 अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामले की जाँच सीबीआई को स्थानांतरित कर दी। अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने अस्पताल प्रशासन द्वारा “गंभीर खामियों” को उजागर किया और कहा कि पांच दिनों के बाद भी जांच में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री ने 17 अगस्त को कोलकाता में एक विशाल रैली निकाली, जिसमें पीड़िता के लिए न्याय और आरोपी, जो पुलिस से जुड़ा एक नागरिक स्वयंसेवक है, को फांसी देने की मांग की गई।

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