सैम पित्रोदा को एक बार फिर इंडियन ओवरसीज़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है। भारतीयों की त्वचा के रंग पर नस्लवादी टिप्पणी को लेकर विवाद के बीच पद से हटने के कुछ सप्ताह बाद कांग्रेस ने पित्रोदा को तत्काल प्रभाव से इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बहाल कर दिया। दोबारा बहाली के बाद पित्रोदा ने कहा कि उन्होंने पद इसलिए छोड़ दिया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक लाभ के लिए उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करना शुरू कर दिया था।
वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने एक आधिकारिक घोषणा में कहा, “माननीय कांग्रेस अध्यक्ष ने श्री सैम पित्रोदा को तत्काल प्रभाव से इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त किया है।”
इस बीच पित्रोदा ने कहा कि उन्होंने पद छोड़ दिया क्योंकि वह खुद को चर्चा से बाहर रखना चाहते थे।
कांग्रेस नेता ने कहा, “प्रधानमंत्री ने तथ्यों को तोड़ना-मरोड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने सैम पित्रोदा के बारे में बात करना शुरू कर दिया। सैम पित्रोदा ने जो कहा, उसमें शामिल होने की उन्हें कोई जरूरत नहीं थी।”
उन्होंने कहा, “जब प्रधानमंत्री आपको ट्रोल करने का फैसला करते हैं, तो देश उनके साथ हो जाता है।”
पित्रोदा ने उन्हें पद से हटाने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने कहा, “पार्टी में हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं। जयराम (रमेश) अलग सोच सकते हैं लेकिन यह उन्हें सही नहीं बनाता। यह पूरी तरह स्वीकार्य है।”
सैम पित्रोदा ने अपनी टिप्पणियों का बचाव करते हुए कहा कि वे नस्लवादी नहीं थे। उन्होंने कहा, “शायद तुलना उतनी अच्छी नहीं थी। मैं एक इंसान हूं और मुझे गलती करने की इजाजत है। मुझसे बात करो, मैंने जो कहा उसके बारे में स्पष्टीकरण मांगो। लेकिन जंगल की आग की तरह मत भागो।”
मालूम हो कि पित्रोदा ने 8 मई को इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि उनकी इस टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया था कि पूर्व में भारतीय चीनियों जैसे दिखते हैं जबकि दक्षिण में लोग अफ्रीकी जैसे दिखते हैं।
द स्टेट्समैन के साथ एक साक्षात्कार के दौरान पित्रोदा ने कहा था, “हम भारत जैसे विविधता वाले देश को एक साथ रख सकते हैं – जहां पूर्व में लोग चीनी जैसे दिखते हैं, पश्चिम में लोग अरब जैसे दिखते हैं, उत्तर में लोग शायद गोरे दिखते हैं, और दक्षिण में लोग अफ्रीकियों की तरह दिखते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम सभी भाई-बहन हैं।”
उन्होनें कहा था, “भारत में अलग-अलग महजब के लोग रहते हैं, उनकी विभिन्न किस्म की पोषाकें हैं, उनका रहन-सहन अलग अलग है, यही भारत है। यही भारत की दुनिया में पहचान है। यहां हर किसी के लिए रहने की जगह है। हर कोई समझौता करते चलता है। मैं तमिलनाडु जाता हूं तो वहां मुझे लोकल भाषा का सामना करना पड़ता है लेकिन हमें कोई परेशानी नहीं होती। हम होटल, बाजार में आसानी से अपना काम करते हैं।”
कांग्रेस ने तुरंत पित्रोदा की टिप्पणियों से दूरी बना ली थी और उन्हें “अस्वीकार्य” करार दिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पोस्ट कर कहा था, “भारत की विविधता को दर्शाने के लिए की गई तुलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य हैं। कांग्रेस इनसे खुद को पूरी तरह से अलग करती है।”
यहां तक कि भाजपा ने भी पित्रोदा की टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और उन्हें ”नस्लवादी और विभाजनकारी” बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने पित्रोदा के बयान के लिए राहुल गांधी की आलोचना की।
प्रधानमंत्री ने कहा था, “आपको जवाब देना पड़ेगा। मेरा देश त्वचा के रंग के आधार पर मेरे देशवासियों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा और मोदी भी इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।”
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, “सैम भाई, मैं पूर्वोत्तर से हूं और भारतीय जैसा दिखता हूं। हम एक विविध देश हैं – हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन हम सभी एक हैं। हमारे देश के बारे में मैं थोड़ा तो समझ लो!”
