कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है। पार्टी सांसद केसी वेणुगोपाल ने यह जानकारी दी। मीडिया को संबोधित करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब को पत्र लिखा और उन्हें सूचित किया कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता होंगे।
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राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद संभालने वाले गांधी परिवार के तीसरे सदस्य होंगे। उनसे पहले, उनके माता-पिता, सोनिया और राजीव गांधी, इस पद पर थे। सोनिया ने 13 अक्टूबर 1999 से 6 फरवरी 2004 तक नेता प्रतिपक्ष को जिम्मेदारी निभाई है तो वहीं राजीव गांधी 18 दिसंबर 1989 से 24 दिसंबर 1990 तक नेता विपक्ष रह चुके हैं।
इससे पहले 9 जून को पार्टी की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि उन्हें कोई भी फैसला लेने से पहले इस बारे में सोचने के लिए कुछ समय चाहिए।
नेता विपक्ष बनने के बाद अब राहुल गांधी के पास होंगी ये शक्तियां-
-राहुल उस कमिटी का हिस्सा बन जाएंगे, जो सीबीआई के डायरेक्टर, सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर, मुख्य सूचना आयुक्त, ‘लोकपाल’ या लोकायुक्त, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के चेयरपर्सन और सदस्य और भारतीय निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ती करती है।
-राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष होने के बाद वह सरकार के आर्थिक फैसलों की लगातार समीक्षा कर पाएंगे और सरकार के फैसलों पर अपनी टिप्पणी भी कर सकेंगे।
-वह उस ‘लोक लेखा’ समिति के भी प्रमुख बन जाएंगे, जो सरकार के सारे खर्चों की जांच करती है. और उनकी समीक्षा करने के बाद टिप्पणी भी करती है।
-Leaders Of Opposition In Parliament Act 1977 के अनुसार नेता प्रतिपक्ष के अधिकार और सुविधाएं ठीक वैसे ही होते हैं, जो एक कैबिनेट मंत्री के होते हैं। अब राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्हें कैबिनेट मंत्री की तरह सरकारी सचिवालय में एक दफ्तर मिलेगा। कैबिनेट मंत्री की रैंक के अनुसार उच्च स्तर की सुरक्षा मिलेगी और उन्हें मासिक वेतन और दूसरे भत्तों के लिए 3 लाख 30 हज़ार रुपये मिलेंगे।
-उन्हें एक ऐसा सरकारी बंगला मिलेगा, जो कैबिनेट मंत्रियों को मिलता है और उन्हें मुफ्त हवाई यात्रा, रेल यात्रा, सरकारी गाड़ी और दूसरी सुविधाएं भी मिलेंगी।
-संसद की मुख्य समितियों में राहुल गांधी बतौर नेता प्रतिपक्ष के रूप में शामिल होंगे और उनके पास ये अधिकार होगा कि वो सरकार के कामकाज की लगातार समीक्षा करते रहेंगे।
मालूम हो कि दस साल बाद कांग्रेस को नेता विपक्ष का पद मिल पाया है क्योंकि 2014 और 2019 में कांग्रेस के पास इतने सांसद नहीं थे कि वो नेता विपक्ष का पद पाते। 2014 और 2019 में भाजपा के बाद संसद में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद, कांग्रेस उन मानदंडों से पीछे रह गई जो उसे सदन में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में स्थान देते। नियम कहता है कि यह पद पाने के लिए कम से कम कुल संख्या का 10 फीसदी सांसद उस पार्टी के पास होना चाहिए। इस बार 99 सांसद वाली कांग्रेस इस पैमाने पर पहुंची।
कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी संख्या लगभग दोगुनी कर 2019 की 52 सीटों से 99 सीटों पर पहुंचा दी। 2014 के चुनावों में, पार्टी सिर्फ 44 सीटें जीतने में सफल रही थी।
इसके साथ ही कांग्रेस ने विपक्ष के नेता का पद फिर से अपने लिए हासिल कर लिया है।
इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी ने लोकसभा में सांसद के रूप में शपथ ली। शपथ लेने के बाद राहुल गांधी ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर कहा, ”जय हिंद, जय संविधान।”
