Farmers’ Protest: शंभू बॉर्डर पर आरपार के मूड में किसान, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले; केंद्र ने फिर की बातचीत की पेशकश

सरकार के साथ चार बार की बातचीत बेनतीजा निकलने के बाद बुधवार को एक बार फिर किसान दिल्ली की तरफ कूच करने की तैयारी में हैं। किसान आंदोलन में शामिल 14 हजार किसानों ने अपने 1200 ट्रैक्टरों के साथ एक बार फिर आगे बढ़ने की कोशिश की। जैसे ही किसान आगे बढ़ने की तैयारी करते, उससे पहले ड्रोन से आंसू गैस के गोले छोड़ दिए गए। पंजाब-हरियाणा सीमा पर सुरक्षा बलों ने बुधवार को रुक-रुक कर आंसू गैस के गोले दागे।

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर का ने कहा कि हमने अभी निर्णय लिया है कि कोई युवा किसान मजदूर आगे नहीं जाएगा। बड़े किसान नेता आगे जाएंगे। हम शांतिपूर्वक आगे जाएंगे। सरकार प्रहार करेगी तो हम खाली हाथ रहेंगे। सरकार हम पर अटैक करने के लिए तैयार हैं।

इस बीच किसानों के साथ पिछले दौर की बातचीत का हिस्सा रहे केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने एक बार फिर उनसे बातचीत की पेशकश की है।

कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि वे आगे भी किसानों से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, शांति बनाए रखना जरूरी है। किसानों ने सरकार के सामने 13 सूत्रीय मांगें रखी थीं, इनमें 10 पर सहमति बन गई है। तीन मांगें पूरी किए जाने पर को लेकर पेच फंसा है। सरकार का कहना है कि इन मांगों को पूरा करने के लिए वक्त की जरूरत है।

क्या है किसानों की मांग?

1. एमएसपी की कानूनी गारंटी।
2. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना।
3. किसानों और खेत में काम करने वाले मजदूरों के लिए पेंशन।
4. कृषि ऋण माफी।
5. बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं।
6. 2021 के लखीमपुर खीरी की हिंसा पीड़ितों के लिए न्याय।
7. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली।
8. 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा।

हरियाणा पुलिस ने पंजाब के समकक्षों से पुलिस बैरिकेड्स को हटाने के लिए प्रदर्शनकारियों द्वारा लाए गए उपकरणों को जब्त करने का आग्रह किया है। 1,200 ट्रैक्टर ट्रॉली, 300 कारों और 10 मिनी बसों के साथ लगभग 14,000 किसान सीमा पर एकत्र हुए हैं।

दिल्ली पुलिस अलर्ट पर है और प्रवेश बिंदुओं को सुरक्षित करने के लिए अभ्यास कर रही है क्योंकि 13 फरवरी से अंतरराज्यीय सीमा पर रुके किसान राष्ट्रीय राजधानी की ओर बढ़ने के लिए तैयार हैं।

केंद्र और हरियाणा सरकार ने किसानों के विरोध को लेकर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था।

अपने विरोध प्रदर्शन को फिर से शुरू करने से पहले, किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने दोहराया कि किसान शांतिपूर्वक प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने सरकार से बैरिकेड हटाने और उन्हें बिना किसी बाधा के दिल्ली जाने की अनुमति देने की अपील की।

किसानों के विरोध से जुड़ा लेटेस्ट घटनाक्रम ये है:

गृह मंत्रालय की आंतरिक रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 1200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, 300 कारों, 10 मिनी-बसों और अन्य छोटे वाहनों के साथ, राजपुरा-अंबाला रोड पर शंभू बैरियर पर लगभग 14000 लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति दी गई है। इसी तरह राज्य ने ढाबी-गुजरान बैरियर पर लगभग 500 ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ लगभग 4500 व्यक्तियों की विशाल सभा की अनुमति दी है।

पंजाब सरकार को लिखे पत्र में गृह मंत्रालय ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है और इसके लिए किसानों के रूप में प्रस्तुत उपद्रवियों को जिम्मेदार ठहराया है। इसमें कहा गया है कि ये “उपद्रवी” पथराव में लगे हुए हैं और हरियाणा के साथ शंभू सीमा पर बुलडोजर और अर्थमूवर्स जैसी भारी मशीनरी लेकर आए हैं।

पत्र में आगे कहा गया है कि शंभू सीमा पर डेरा डाले हुए किसानों द्वारा लाए गए बुलडोजर और अन्य उपकरणों को पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ने के लिए “संशोधित और कवच-प्लेटेड” किया गया है। इसमें कहा गया है, “इन मशीनों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाना है, जिससे ड्यूटी पर तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा और हरियाणा में सुरक्षा परिदृश्य से समझौता होने की संभावना है।”

अधिकारियों ने कहा कि सड़क बंद होने के कारण दिल्ली के तीन सीमा बिंदुओं के आसपास के इलाकों में यातायात की भीड़ देखी जा सकती है। टिकरी और सिंघू – दिल्ली-हरियाणा सीमा पर दो बिंदु – पुलिस कर्मियों की भारी तैनाती और कंक्रीट बैरिकेड और लोहे की कीलों की कई परतों के साथ सील कर दिए गए हैं। एक अधिकारी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो गाजीपुर बॉर्डर भी बंद किया जा सकता है।

मंगलवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि वह किसानों को बड़ी संख्या में इकट्ठा होने की इजाजत न दे। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को राजमार्गों पर नहीं चलाया जा सकता है और कहा कि किसान बस या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करके दिल्ली जा सकते हैं।

विरोध फिर से शुरू होने की पूर्व संध्या पर किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा था कि केंद्र को फसलों के लिए एमएसपी पर कानून लाने के लिए एक दिवसीय संसद सत्र बुलाना चाहिए। उन्होनें कहा, “हमारी मांग है कि एमएसपी की गारंटी वाला कानून लाया जाए। अगर प्रधानमंत्री में इच्छाशक्ति हो तो संसद का एक दिन का सत्र बुलाया जा सकता है। कोई भी विपक्षी दल इसका विरोध नहीं करेगा।”

पंढेर ने आगे दावा किया कि उनके मार्च को रोकने के लिए हरियाणा के गांवों में अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

उन्होंने कहा, ”देश ऐसी सरकार को माफ नहीं करेगा। हरियाणा के गांवों में अर्धसैनिक बल तैनात हैं। हमने क्या अपराध किया है? हमने आपको प्रधानमंत्री बनाया है। हमने कभी नहीं सोचा था कि सेनाएं अत्याचार करेंगी। कृपया संविधान की रक्षा करें और हमें शांतिपूर्वक दिल्ली की ओर जाने दें। यह हमारा अधिकार है।”

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