कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने गुरुवार को अजमेर से अपनी ‘जन संघर्ष यात्रा’ शुरु की। पायलट राजस्थान में कथित भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ अजमेर से जयपुर तक 5 दिवसीय यात्रा निकाल रहे हैं।
सचिन पायलट ने कहा कि, “वसुंधरा जी के कार्यकाल में लगातार भ्रष्टाचार हुआ। उस समय मैंने अध्यक्ष रहते हुए आरोप लगाए थे। जनता को हमने ये आश्वासन दिया कि सत्ता में आएंगे तो दूध का दूध पानी का पानी करेंगे। मैंने मौजूदा मुख्यमंत्री को 1.5 साल तक लगातार चिट्ठी लिखी कि वसुंधरा राजे सरकार के समय लगे आरोपी की जांच होनी चाहिए। परन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
उन्होंने कहा- ‘पिछले कुछ समय में लगातार पेपर लीक हुए। बात युवाओं के भविष्य की है। कौन-कौन लोग इस पेपर लीक के पीछे हैं मैंने ये बात उठाई थी। जांच पूरी हुई नहीं और कहा गया कि कोई अधिकारी कोई नेता इसमें शामिल नहीं है।’
ये यात्रा एक तरह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके पूर्व डिप्टी के बीच लंबे समय से चल रही राजनीतिक लड़ाई की परिणति का कारण बन सकती है, जो राजस्थान में कांग्रेस सरकार के लगभग पूरे वर्तमान कार्यकाल तक चली है। दोनों मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए लकड़हारे रहे हैं और अक्सर खुली निंदा करते हैं, एक-दूसरे पर कटाक्ष करते हैं और जिद करते हैं।
जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पायलट ने स्पष्ट रूप से कहा कि गहलोत अपना नेता सोनिया गांधी को नहीं, बल्कि भाजपा की वसुंधरा राजे को मानते हैं। दरअसल, अशोक गहलोत ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि वसुंधरा राजे उन तीन भाजपा विधायकों में से एक थीं जिन्होंने उनकी सरकार को बचाने में मदद की थी।
सचिन पायलट ने कहा था कि, “यह स्पष्ट है कि सोनिया गहलोत की नेता नहीं हैं। यह स्पष्ट है कि वसुंधरा गहलोत की नेता हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं और मेरे सहयोगी नेतृत्व परिवर्तन चाहते थे। हमने अपनी भावनाओं से अवगत कराया। एक समिति का गठन किया गया। स्वर्गीय अहमद पटेल इसका हिस्सा थे।”
