प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO-India) की आधारशिला रखी और 5800 करोड़ रुपये से अधिक की वैज्ञानिक परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने स्मारक डाक टिकट व सिक्का भी जारी किया।
पीएम ने पर कहा कि मैं उस दिन को कभी नहीं भूल सकता जब अटल जी ने भारत के सफल परमाणु परीक्षण की घोषणा की थी। इससे भारत ने न केवल अपने वैज्ञानिक सामर्थ्य को साबित किया था बल्कि भारत के वैश्विक कद को भी ऊंचाई दी थी।
उन्होंने कहा- 2014 के बाद से भारत ने जिस तरह से साइंस और प्रौद्योगिकी पर जोर दिया है वह बड़े बदलावों का कारण बना है। पहले जो साइंस सिर्फ किताबों तक सीमित था वह अब प्रयोग से आगे बढ़कर पेटेंट में बदल रहे हैं। भारत में 10 साल पहले 1 साल में 4 हजार पेटेंट ग्रांट होते थे लेकिन आज इनकी संख्या 30 हजार से ज्यादा हो गई है।
पीएम ने आगे कहा कि, ‘हमने जो स्टार्टअप इंडिया अभियान शुरु किया, जो डिजिटल इंडिया अभियान शुरु किया, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई उसने भी प्रौद्योगिक क्षेत्र में भारत की सफलता को और नई ऊंचाई दी।’
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का उत्सव 1999 में पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और प्रौद्योगिकीविदों को सम्मानित करने के लिए शुरू किया गया था। वाजपेयी ने भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के लिए काम किया और मई 1998 में पोखरण परीक्षणों का सफल संचालन सुनिश्चित किया। तब से हर साल 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है।
प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी उनमें लेजर इंटरफेयरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑफ z3 इंडिया होमी भाभा कैंसर सेंटर और अनुसंधान केंद्र चटनी उड़ीसा और टाटा मेमोरियल अस्पताल के मुंबई का प्लेटिनम जुबली ब्लॉक भी शामिल है। इस मौके पर उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी प्रगति को दर्शाने वाले एक्सपो का उद्घाटन भी किया। साथ ही एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। नेशनल टेक्नोलॉजी डे के इस समारोह में अटल इन्नोवेशन मिशन पर विशेष ध्यान दिया गया।
