भारतीय राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले शरद पवार द्वारा एनसीपी अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुंबई में आगे की राह पर चर्चा की है। पवार ने मंगलवार को यह कह कर धमाका कर दिया था कि वह एनसीपी के प्रमुख पद से इस्तीफा दे रहे हैं लेकिन सार्वजनिक जीवन से संन्यास नहीं ले रहे हैं। तो अब सवाल ये है कि क्या पवार विपक्ष के एकता मिशन का नेतृत्व करेंगे?
पवार ने अपने फैसले से एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पवार ने एक तरफ बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ किया तो विपक्षी नेताओ में बेचैनी बढ़ा दी है।
पवार ने एक मास्टर स्ट्रोक चलकर अपने विरोधियों को चित कर दिया है। शरद पवार के एक फैसले से न केवल पूरे महाराष्ट्र की राजनीति प्रभावित हुई है बल्कि विपक्षी एकता की मुहिम चला रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी झटका लगा है। इसके साथ ही पवार के इस फैसले से महाराष्ट्र में बीजेपी के अरमानों पर भी पानी फिरता दिख रहा है। माना जा रहा है कि शरद पवार ने एक तरफ बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ किया है, वहीं पार्टी में बगावत कर बीजेपी से हाथ मिलाने की सोच रखने वालों को तगड़ा झटका भी दिया है। उधर पवार ने अपने भतीजे अजित पवार की महत्वाकांक्षा को बुरी तरह से कुचल डाला है जिससे फिलहाल अजित के बीजेपी के साथ जाने का मंसूबा भी खत्म होता दिख रहा है। हालांकि बीजेपी ने इस पुरे मसले को आंतरिक मसला करार दिया है।
पवार के इस फ़ैसले से जहां महाराष्ट् की राजनीति में उथल पुथल मचा हुआ है वही विपक्षी एकता की मुहिम चला रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी धक्का लगा है। कांग्रेस की शह पर फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी संभावना तलाश रहे नीतीश कुमार को शरद पवार के फैसले ने हिला कर रख दिया है। राजनीति के जानकार भी मानते हैं कि शरद पवार ने यह कहकर सबको भ्रम में डाल दिया है कि आखिरकार पवार का अगला कदम क्या होगा?
शरद पवार के इस पासे का अंत जो भी हो लेकिन इससे बीजेपी खुश है क्योंकि कहीं न कहीं पवार विपक्ष के एक पिलर भी थे। विपक्ष की राजनीति को इससे झटका लगने की उम्मीद है। आने वाले समय में महाराष्ट्र में एमवीए में दरार आना भी तय माना जा रहा है।
