‘वारिस पंजाब दे’ प्रमुख अमृतपाल सिंह का करीबी पप्पलप्रीत सिंह को सोमवार को अमृतसर के काथू नंगल इलाके से गिरफ्तार किया गया है। सूत्रों से खबर है कि पप्पलप्रीत सिंह को असम की डिब्रूगढ़ जेल में रखा जाएगा। उसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है। NSA बिना किसी शुल्क के एक वर्ष तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। सूत्रों ने बताया कि अमृतपाल के गुरु माने जाने वाले पप्पलप्रीत सिंह के खिलाफ छह अन्य मामले भी दर्ज हैं।
पंजाब के IGP सुखचैन सिंह गिल ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि, “पंजाब पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर ‘वारिस पंजाब दे प्रमुख’ अमृतपाल सिंह के मुख्य सहयोगी पप्पलप्रीत सिंह को एनएसए के तहत अमृतसर के काथू नंगल इलाके से हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा वह 6 मामलों में वांछित भी है”।
अमृतपाल सिंह और पप्पलप्रीत पिछले महीने पुलिस के जाल से नाटकीय ढंग से भागने के बाद से ही साथ थे। अब तक अमृतपाल सिंह के आठ करीबी सहयोगियों को उच्च सुरक्षा वाली डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किया गया है और उन सभी पर एनएसए के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अमृतपाल सिंह के चाचा हरजीत सिंह को 21 मार्च को डिब्रूगढ़ जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था। उसके छह दिन बाद एक सेवानिवृत्त सेना कांस्टेबल वरिंदर सिंह उर्फ फौजी, जो अमृतपाल के अंगरक्षक थे, उन्हें भी असम के लिए रवाना किया गया था।
पंजाब पुलिस की जांच में खुलासा हुआ था कि खालिस्तानी उपदेशक अमृतपाल सिंह और उसका सहयोगी पप्पलप्रीत सिंह कार्रवाई के बाद अलग-अलग डेरों में शरण ले रहा था। पंजाब पुलिस अमृतपाल और पप्पलप्रीत को पकड़ने के लिए होशियारपुर सहित कई जगहों पर तलाशी ले रही थी।
पप्पलप्रीत की गिरफ्तारी सीसीटीवी फुटेज के सोशल मीडिया पर वायरल होने के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें उसे होशियारपुर के एक गांव के डेरा में देखा गया था। ये फुटेज 29 मार्च का बताया गया था, जिसके एक दिन बाद काउंटर इंटेलिजेंस विंग की एक टीम ने फगवाड़ा से होशियारपुर तक एक इनोवा कार का पीछा किया था। पुलिस को संदेह था कि भगोड़ा अमृतपाल और उसका सहयोगी उस वाहन में हो सकते हैं।
बता दें कि पप्पलप्रीत सिंह को आईएसआई लिंक वाले अमृतपाल सिंह का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। दीप सिद्धू की मृत्यु के बाद वारिस पंजाब दे की बागडोर संभालने के दौरान उसने अमृतपाल का मार्गदर्शन किया था। पप्पलप्रीत को ही अमृतपाल के भागने का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। पेशे से, पप्पलप्रीत अमृतसर का एक पत्रकार है जो “पंजाब शील्ड” वेबसाइट चलाता है।
अमृतपाल सिंह का तब से पता नहीं चल रहा है जब से पंजाब पुलिस ने उसके खिलाफ मेगा-कार्रवाई शुरू की है। ये कार्रवाई उस घटना के तीन हफ्ते बाद शुरू हुई जब अमृतपाल सिंह अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ एक गिरफ्तार व्यक्ति की रिहाई के लिए अमृतसर के पास अजनाला पुलिस थाने में घुस आया था। भगोड़ा अमृतपाल सिंह 18 मार्च को जालंधर जिले में पुलिस की पकड़ से फरार हो गया था और अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है। अमृतपाल और पप्पलप्रीत सिंह पर वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने, हत्या के प्रयास, पुलिस कर्मियों पर हमले और लोक सेवकों द्वारा कर्तव्य के वैध निर्वहन में बाधा उत्पन्न करने के लिए मामला दर्ज किया गया है।
