दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) का ई-हॉस्पिटल सर्वर बुधवार सुबह सात बजे से ही डाउन है। अब तक करीब 35 घंटे का वक़्त बीत चुका है लेकिन दो दिन बाद भी स्थिति नियंत्रण के बाहर है। AIIMS ने एक बयान में कहा कि, ‘AIIMS में काम कर रही एनआईसी की एक टीम ने सूचित किया है कि यह एक रैंसमवेयर हमला हो सकता है’। इस हमले की वजह से AIIMS में ओपीडी, सैंपल कलेक्शन, ऑपरेशन प्रक्रिया समेत अन्य सभी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। ई-हॉस्पिटल सर्वर प्रभावित होने के बाद AIIMS ने फिलहाल सभी सेवाएं मैनुअल मोड में कर दी है। देश के अलग-अलग राज्यों से एम्स में रोजाना हजारों लोग इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में सर्वर डाउन की समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।
AIIMS दिल्ली के सर्वर पर मौजूद जानकारी काफी संवेदनशील मानी जा रही है। देश की सभी बड़ी और नामचीन हस्तियों के मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य जानकारियां इस सर्वर पर उपलब्ध हैं। इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री और कई V मंत्रियों का डेटा शामिल है।
AIIMS पर हुए इस साइबर हमले की निगरानी अब आईटी मंत्रालय भी कर रहा है। एनआईसी निदेशक और अधिकारी इस ऑपरेशन को देख रहे हैं। एक्सपर्ट की टीम का कहना है कि मुख्य सर्वर के अलावा बैकअप सर्वर पर भी साइबर अटैक हुआ है, जिस कारण अधिकांश फाइल करप्ट हो गयी है। एक्सपर्ट की टीम लगातार सर्वर बहाल करने के प्रयास में लगी हुई है। AIIMS प्रबंधन ने कहा है कि भविष्य में संस्थान पर इस तरह का हमला न हो इसको लेकर भी पूरी सावधानी बरतने की कोशिश कर रहे हैं।
एम्स के एक अधिकारी ने बताया कि, ‘सर्वर बंद होने से स्मार्ट लैब, बिलिंग, रिपोर्ट जनरेशन और अपॉइंटमेंट सिस्टम समेत ओपीडी और आईपीडी डिजिटल अस्पताल सेवाएं प्रभावित हुई हैं।’
AIIMS की तरफ से जो प्रेस रीलीज जारी की गई है उसमे कहा गया है कि, ‘ये जो सर्वर हैक हुआ है, ये एक तरह का साइबर-अटैक है। इसकी जांच की जा रही है और फिलहाल एम्स में मैनुअल मोड पर काम हो रहा है’।
मालूम हो कि बुधवार सुबह को सर्वर ठप हो जाने के बाद से लेकर अब तक हॉस्पिटल पहुंचे मरीजों के ओपीडी पर्चे नहीं बन सके हैं। मैनुअल तरीके से मरीजों के कार्ड और पर्चे बनाए जा रहे हैं, जिसके चलते लंबी-लंबी कतारें काउंटर पर बुधवार और गुरुवार- दोनों ही दिन लगी रहीं। मरीजों को इलाज मिलने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
बता दें कि 2019 तक ‘वेनाक्राई’ रेनसमवेयर ने दुनिया के डेढ़ सौ से अधिक देशों के 230000 कंप्यूटर को संक्रमित कर दिया था। इरान का न्यूक्लियर पावर प्लांट, स्टक्सनेट वायरस से ग्रसित हो गया था। यूक्रेन की पावर कंपनियां भी साइबर अटैक से नहीं बच सकी थी। ‘शूमन’ वायरस ने सऊदी अरब की फर्म ‘अरामको’ के 30 हजार से ज्यादा कंप्यूटरों को संक्रमित कर दिया था।
कब कब हुए बड़े साइबर अटैक?
2017: यूके के नेशनल हेल्थ सिस्टम ‘एनएचएस’ पर रेनसमवेयर साइबर अटैक हुआ था और करीब 15 दिनों तक मैनुअल तरीके से काम करना पड़ा था। भारत में भी चार साल पहले तक 48000 से ज्यादा ‘वेनाक्राई रेनसमवेयर अटैक’ डिटेक्ट हुए थे।
2016: हैकर्स ने मात्र तीन घंटे में जापान के 14 हजार एटीएम से 1.4 बिलियन येन, निकाल लिए थे। साउथ अफ्रीका के एक बैंक से डाटा चुराकर नकली क्रेडिट कार्ड तैयार किए गए।
2007: यूरोप के एस्टोनिया और वहां की संसद पर प्रभाव डालने के लिए बड़े स्तर पर ‘क्रिटिकल इंर्फोमेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ को निशाना बनाया गया। वहां पर तीन सप्ताह साइबर हमलों का असर देखने को मिला।
