भारत 1 दिसंबर से औपचारिक रूप से G-20 की अध्यक्षता ग्रहण करने वाला है और उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार से इंडोनेशिया के दौरे पर हैं। पीएम इंडोनेशिया की राजधानी बाली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध और कई अन्य वैश्विक चुनौतियों के बीच होने जा रहे इस समिट को अत्यंत महत्वपुर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री तीन प्रमुख सत्र- खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन और स्वास्थ्य में भाग लेंगे। पीएम 15 और 16 नवंबर को दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह समिट इस बार भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि समिट के समापन समारोह में इंडोनेशिया, G-20 की अध्यक्षता भारत को सौंपेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बाली दौरा करीब 45 घंटे का होगा जहां पीएम 20 कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इन्हीं कार्यक्रमों में G-20 शिखर समिट भी शामिल है। प्रधानमंत्री लगभग 10 वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के इस यात्रा के संबंध में जानकारी देते हुए विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने बताया कि ये शिखर सम्मेलन भारत के लिए इसलिए विशेष है क्योंकि ये 1 दिसंबर से एक साल के लिए भारत G-20 ग्रुप की अध्यक्षता करेगा। बाली में भारत को इसकी अध्यक्षता सौंपी जाएगी। प्रधानमंत्री समापन सत्र में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति से G-20 की अध्यक्षता प्राप्त करेंगे।
विदेश सचिव ने बताया कि बाली में प्रधानमंत्री मोदी 15 नवंबर को एक स्वागत समारोह में भारतीय समुदाय और भारत के लोगों को संबोधित करेंगे और उनसे बातचीत करेंगे। पूरे इंडोनेशिया में भारतीय समुदाय और प्रवासियों को मजबूत स्थिति में माना जाता है।
विदेश सचिव ने आगे कहा कि भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान इंडोनेशिया और ब्राजील शामिल होंगे। G-20 में यह पहली बार होगा कि ट्रोइका में लगातार तीन विकासशील देश और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल होंगी।
इस समिट में भारत, चीन और अमेरिका समेत अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग हिस्सा लेंगे। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन, समिट से इतर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के लिए उत्सुक हैं।
विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री कई नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठक करेंगे, लेकिन शी जिनपिंग के साथ बैठक होगी या नहीं, इस सवाल का उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अन्य नेताओं के साथ ये द्विपक्षीय संबंध अभी भी निर्धारित होने की प्रक्रिया में हैं। बैठकों में विकास को लेकर चर्चा की जाएगी। बता दें कि इससे पहले मोदी और शी ने सितंबर में उज्बेकिस्तान के समरकंद में SCO समिट में हिस्सा लिया था लेकिन उनके बीच ना तो कोई द्विपक्षीय बैठक हुई थी और ना ही कोई मुलाकात।
प्रधानमंत्री मोदी 16 नवंबर को बाली शिखर सम्मेलन के समाप्त होने के बाद वहां से स्वदेश के लिए रवाना होंगे।
G-20 शिखर सम्मेलन में किन चुनौतियों पर हो सकती है चर्चा?
– ऊर्जा संकट
– मुद्रास्फीति
– पर्यावरण
– कृषि
– स्वास्थ्य
– डिजिटल परिवर्तन
– महामारी के बाद आर्थिक सुधार
– वैश्विक दक्षिण के देशों में ऋण कमजोरियां
– यूरोप में चल रहे संघर्ष और इसके प्रभाव
– दुनिया के सभी देशों पर खाद्य सुरक्षा चुनौतियां
क्या है G20?
G-20 ग्रुप विश्व की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर सरकारी मंच है। इस समूह में भारत, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूके, अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं। G-20 अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का प्रमुख मंच है, जो वैश्विक GDP का लगभग 85 प्रतिशत, वैश्विक व्यापार का 75 प्रतिशत से अधिक और विश्व की लगभग दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। भारत वर्तमान में जी-20 ट्रोइका (G-20 की वर्तमान, पिछली और आगामी अध्यक्षता) का हिस्सा है, जिसमें इंडोनेशिया, इटली और भारत शामिल हैं।
