प्रयागराज: परिषदीय और अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूलों की 2021-22 सत्र की जनपदीय क्रीड़ा प्रतियोगिता 15 व 16 दिसंबर को केपी इंटर कॉलेज में होगी।सर साल ऐसी प्रतियोगिता होती है। लेकिन आज तक ग्रामीण स्तर पर खेलों के विकास के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है।आज भी ग्रामीण प्रतिभाएं असमय खो जाती हैं।
बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने आयोजन के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया है। इस दौरान वॉलीबाल, फुटबाल, क्रिकेट, हॉकी, कुश्ती, विभिन्न प्रकार की दौड़, गोला फेंक, चक्का फेंक, लंबी कूद, ऊंची कूद, कबड्डी, खो-खो, तैराकी, हैंडबाल, योगा, जूडो, टेबल-टेनिस, जिम्नास्टिक, व्यायाम व विशेष प्रदर्शन, एकांकी, लोकगीत, लोकनृत्य आदि प्रतियोगिताएं होंगी। प्रतियोगिता के दौरान कोविड गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश दिए हैं। जिले के बेसिक स्कूलों में हाल में ही पहले संकुल स्तरीय और फिर ब्लाक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की और विजेता टीमें जिला स्तरीय स्कूली खेल में भाग लेंगे।
गत वर्ष कोरोना के कारण ये खेल कूद प्रतियोगिता आयोजित नहीं की गई थी। प्रतियोगिता के आयोजन के लिए बनाई गई समितियों के जिम्मे ही स्पर्धा के संचालन की जिम्मेदारी रहेगी। उल्लेखनीय है कि स्कूली स्तर से ही राष्ट्रीय खिलाड़ी निकलते हैं। स्कूलों में तमाम तरह की सुविधाएं सरकार उपलब्ध करा रही है लेकिन आज भी तमाम स्कूलों के पास अपना खेल का मैदान नहीं है। स्कूलों में खेल के सामान नहीं है और तो और बच्चों को खेल की बारिकियों को बताने या खेल खिलाने के लिए कोई औसत विशेषज्ञ भी नहीं है।इन हालातों में ग्रामीण प्रतिभाओं का विकास और निखार कैसे होगा। ये प्रश्न पहले भी अनुत्तरित था और आज भी अनुत्तरित है। हर साल इस तरह की प्रतियोगिता होती है और अपने अंजाम के बिना खत्म हो जाती है।
बेसिक स्कूलों में जितना ध्यान मिड-डे मील में दिया जाता है, उसका आधा भी शिक्षा और खेल पर दे दिया जाये तो धीरे धीरे खेल के मैदान भी ग्रामीण प्रतिभाओं से भर जायें। शहरों में आज कल क्रिकेट पर ही अधिक जोर दिया जाता है। क्रिकेट अकादमी की भरमार है और उसके बाद हाकी अकादमी भी देखी जाती है लेकिन फुटबॉल, एथलेटिक्स, कबड्डी या खो-खो जेसे खेलों के लिए कोई अकादमी नहीं है। यही नहीं इन खेलों के विशेषज्ञ खिलाड़ी भी आगे आ कर नये खिलाड़ी तलाश करने में जोर नहीं देते हैं।
