शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम के खिलाफ हैदराबाद में एफआईआर,यूपी में भी उलमाओं की कार्रवाई की मांग

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी के खिलाफ हैदराबाद में एफआईआर दर्ज कराई गई है। बुधवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रिजवी के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। इस दौरान वह यहां के पुलिस कमीश्नर से मिले और रिजवी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की।ओवैसी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि उन्हें (रिजवी) जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। दरअसल, रिजवी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी किताब ‘मोहम्मद’ में पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हैं।

क्या है किताब पर विवाद?

वसीम रिजवी ने गाजियाबाद के डासना के महाकाली मंदिर में दर्शन करने के बाद महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती से अपनी विवादित किताब ‘मोहम्मद’ का विमोचन कराया था। उनका दावा है कि ‘इस्लाम दुनिया में क्यों आया और इतना आतंकवादी विचार क्यों रखता है?’ इसी बात को यह किताब उजागर करती है। इसके अलावा उनका दावा है कि ये किताब पैगंबर मोहम्मद साहब के चरित्र को भी उजागर करती है। लखनऊ में भी शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जवाद के नेतृत्व में उलमाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मिल कर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। मौलाना कल्बे जवाद ने वसीम रिज़वी की किताब पर बैन लगा कर और बाजार में उपलब्ध किताबों को जब्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर ये ग़लत तथ्यों पर आधारित किताब विदेशों खास कर मुस्लिम देशों में चली गई तो भारत की बदनामी होगी। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों हुए सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव में भी वसीम रिज़वी की हार हुई है।अपनी हार को देख कर वसीम ने अपने एक लौते समर्थक के साथ चुनाव का बहिष्कार कर दिया था।उसके स्थान पर अब अली जैदी शिया वक्फ बोर्ड के नाते चेयरमैन निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये गये हैं।वह कल्बे जवाद समर्थक माने जाते हैं।ये भी तथ्य है कि वसीम के खिलाफ सीबीआई जांच भी चल रही है।उस पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे हैं। इलाहाबाद में वक्फ बोर्ड के एक पुराने इमाम बाड़े को उसके समर्थक के जरिए बेचे जाने भी मामला है।बाद में वहां बनी नई दुकानों को एडीए ने अवैध बता कर गिरा दिया।

पहले भी विवादों में रहे हैं रिजवी

वसीम रिजवी पहले भी विवादों में रहे थे। उन्होंने कुरान की 26 आयतें हटाने की वकालत की थी और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि कुरान की 26 आयतें आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया था। शीर्ष कोर्ट ने रिजवी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था।इस बार सदस्यों के मनोनयन में योगी सरकार ने 2022 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने वसीम रिजवी के मुकाबले कल्बे जव्वाद को अहमियत देने का फैसला किया। इसीलिए योगी सरकार ने मनोनीत सदस्यों में कल्बे जव्वाद के करीबियों को जगह मिली।ऐसे में वक्फ एक्ट के नियमों की अवहेलना करते हुए सरकार ने तीन की जगह पांच सदस्यों को नामित कर दिया। यूपी बार काउंसिल की जगह दिल्ली बार काउंसिल के सदस्य को वक्फ बोर्ड का मेंबर बना दिया।

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