कोरोना से उपजी नाराजगी और जिला पंचायत चुनाव में मुँह की खाकर इस बार ब्लॉक प्रमुख चुनाव में सारी हदों को पार करते हुये, जिस तरह से प्रदेश में अलग-अलग जगह पर हिंसा और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और बलात्कारी मानसिकता के साथ प्रयोग हुये है वो निहायत घटिया और शर्मनाक हैं। अपराध में प्रदेश अपने कई सालों के चरम पर हैं। 2017 में सत्ता का परिवर्तन होते समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि उनके घर की महिलाओं के साथ घर के अंदर घुसकर बलात्कार होगा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में, आजमगढ़ की घटना इसकी बानगी भर हैं।
लखीमपुर खीरी में एक महिला को इसलिए नंगा किया गया क्योंकि उसने ब्लॉक प्रमुख के नामांकन के लिए अपनी तरफ से प्रस्ताव पारित किया था। आज इटावा में भाजपाई गुंडों का आतंक इतना बढ़ गया कि सरेआम सिटी SP को गुंडे उत्पात रोकने के एवज में तमाचा रसीद करके आराम से निकल जाते हैं। पुलिस के बंदे ये प्रदेश के हालात बया करने के लिए काफी है।
उन्नाव की बेटी का हश्र हमनें देखा पूरे परिवार को खत्म कर दिया गया, हाथरस कांड में सरकार कोर्ट में नंगी हुई अपने झूठ के कारण पर इन बेशर्मो को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि विपक्ष में अब संतानें शिखंडी हो चुकी हैं।
पौरुष उनके सामर्थ्य की बात नहीं, वरना निर्भया कांड में गद्दी छीन लेने वाली जनता आज भी जिंदा हैं। बस इनके माथे पर जबरन जाति, परिवारवाद, और पैसों के वीर्य से पैदा होने वाले नेता आ बैठे हैं।
उप्र में महिलाओं के खिलाफ ऐसे अपराध हो रहे हैं कि रूह कांप जाए, लेकिन सरकार सो रही है। क्योंकि इनका एक जुमला भर था बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ।
मथुरा में एक साल से लड़की को परेशान कर रहे गुंडों ने घर में घुसकर उसे छत से फेंक दिया। हमीरपुर में छेड़खानी से परेशान युवती ने आत्महत्या कर ली। गोरखपुर, वाराणसी और अलीगढ़ जैसी सैकडों कहानियां हैं।
जंगलराज में महिलाओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
पूरे उत्तर प्रदेश में जो कुछ चल रहा है, इसका कारण अगले साल, 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव का रिहर्सल मात्र है। बाकायदा जिलाधिकारी स्तर के अधिकारी पुलिस के अधिकारियों को कह रहे हैं कि सीसीटीवी कैमरा बन्द करके जो करना है कर लो बाद में शान्ति-पाठ की रस्म निभाई जाएगी। मामला जिला औरैया का है। पंचायत चुनाव में भाजपा की सनक में लाखों अर्थियां उठ चुकी हैं।
बिल्कुल इसी तर्ज़ पर उतर प्रदेश का अगला विधानसभा चुनाव भाजपा लड़ने की तैयारी कर रही हैं। ऊंची कुर्सी पर बैठे नौकरशाह, गुंडे, मवाली और दंगाइयों को काम पर लगाया गया हैं। यही है गुजरात मॉडल।
अपराधी किस्म के नेता और पुलिस-प्रशासन की तिकड़ी खुले आम भाजपा के लिए काम करके मतदाताओं को डराने-धमकाने, विरोधियों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज़ कर उनको चुनाव में हिस्सा लेने से रोकने, विरोधियों के चुनाव-प्रचार में हर तरह के बाधा व्यवधान (गैर-कानूनी) पैदा करने के लिए पुलिस के संरक्षण में काम कर रहे हैं। जिनको शह है पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का। क्योंकि वो खुद अंदरूनी लड़ाई और अपनी कुर्सी बचाने में गुटबाजी में व्यस्त हैं।
मंदिर मस्जिद और जाति के बाद अब निशाने पर है महिलाएं जिनको मरना हर हाल में हैं क्योंकि अब तो उनकी लाज घर की।ड्योढ़ी के अंदर भी सुरक्षित नहीं। बाप और भाई के सामने उनकी लूटती इज्जत तो खाप को भी पीछे छोड़ आई है। इतनी हिम्मत आई कहा से इन अपराधियों से पास क्योंकि सत्ता का संरक्षण मिला हुआ है, तभी तो कभी सेंगर का खानदान हो या कोई और भाजपा अपनी जांघो पर बिठाकर टिकट दे रही हैं।
जातिगत समीकरण में सवर्णों को अपने पीछे करके दलितों, और पिछड़े वर्ग को निशाना बना कर अपेक्षाकृत सामाजिक रुप से कमजोर हिस्से, को जोड़ने की कोशिश होगी और शो-पीस की तरह दलित-आदिवासियों के इक्के-दुक्के प्रत्याशी खड़ा कर देंगे।
मोहन भागवत का सबका DNA एक होना बताना इस तरफ इशारा करता है की शायद इस बार थाली में कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के टिकट की बोटी डाली जायेगी।
उत्तर प्रदेश हर-हाल में हर कीमत पर जीतना है,चाहे उसके लिए कुछ भी क्यों न करना पड़े। क्योंकि 2024 का रास्ता यहीं से होकर जाता हैं, बड़ा प्रदेश देश का मुखिया चुनता है, और आने वाले दिनों में मोदी के वारिश अमित शाह को आगे लाने की प्रयोगशाला की कीमत ऊत्तरप्रदेश चुका रहा है । अपने बहु बेटियों और अपराध का शिकार बनते देखकर।
