LAC-18 किलोमीटर में चीन कब्ज़ा करके बैठा है, प्रधानमंत्री बताये की वो चीन के साथ है या देश के साथ-सुप्रिया श्रीनेत

 

दिल्ली: आज गलवान वैली संघर्ष के एक साल पूरे हुए है पिछले साल भारतीय सेना के 20 जवानों की शहादत हुई थी, चीन के साथ झड़प में। सैनिकों ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए चीन के हथियारों से लैस सैनिकों से जमकर मुकाबला किया था। देश को गर्व है कांग्रेस पार्टी को गर्व है अपने इन वीर सैनिकों पर। जिन्होंने अपनी खून की बूंदों से सींच कर भारत की जमीन को दुश्मनों से बचाया। लेकिन बजाय हमारे सेना और सैनिकों के साथ खड़े होने के सरकार अलग ही राह पर काम कर रही है। लगातार चीन पर झूठे बयान और गोलमोल जबाव देती है।

 

आज देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछता है की क्या हमारे सैनिकों की शहादत व्यर्थ थी? “कोई घुसा नहीं है” —प्रधानमंत्री का इतना बड़ा झूठ कोई कैसे भूल सकता है?  

आज देश जानना चाहता है कि फरवरी में जब सरकार ने गाजे बाजे के साथ डिसएंगेजमेंट का ढोल पीटा था उसके बाद भी चीन क्यों और कैसे कई रणनैतिक जगहों पर घुसपैठ करके बैठा हुआ है। देश जानना चाहता है की अपने पराक्रम एवं शौर्य के बल पर जिस कैलाश रेंज पर हमारी सेना ने कब्ज़ा किया था, और जिससे चीन को भी खतरा था, उससे सेना को हटाने का पाप क्यों किया गया?

 

चीन आज भी रणनैतिक जगहों पर मौजूद

बात तो चीन को वापस धकेल कर अप्रैल 2020 की यथावत स्थिति (Status Quo Ante) स्थापित करने की थी,  पर पैंगोंग त्सो में भारतीय और चीनी सैनिकों के विस्थापित होने के चार महीने बाद और कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के दो महीने बाद भी चीन गोगरा, हॉट स्प्रिंग और डेपसांग प्लेंन्स जैसी रणनीतिक जगहों पर घुसपैठ किये बैठा है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण  LAC के 18 किलोमीटर अंदर तक डेपसांग प्लेंन्स के ‘वाई जंक्शन’ तक घुसपैठ कर रखी है और भारतीय सेना को अपने ही पैट्रोलिंग प्वाईंट्स PP-10, PP-11, PP-11A, PP-12 एवं PP-13 तक पैट्रोलिंग करने से रोक रखा है। इससे दौलतबेग ओल्डी हवाई पट्टी को भी खतरा है।जब सेना ने पराक्रम दिखा कर कैलाश रेंज पर कब्ज़ा किया तो चीन घबरा गया, लेकिन बजाय अपनी सेना के साथ खड़े हों , सरकार ने सेना को पीछे हटा दिया।

 

इस एक जगह से हम चीन को नाक रगड़ने के लिए मजबूर कर सकते थे, पर हमने तो वार्ता में सबसे पुरज़ोर मुद्दे को पहले ही मान लिया – इसी कारण अब चीन को बाकी जगहों से पीछे धकेलने में दिक्कत हो रही है।  इस बीच चीन ने LAC पर फोर्टिफिकेशन्स खड़े किए, एयर स्ट्रिप बनाये, तमामों एयर बेस और एयरफील्ड को अपग्रेड किया। चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 100 घरों का एक गांव तक बसा दिया।मोदी सरकार ने पांगोंग त्सो लेक के उत्तरी छोर पर फिंगर 4 से हमारी सेना की पोस्ट को फिंगर 3 पर पीछे हटा लेने कि वजह से मोदी सरकार ने बफर ज़ोन अपनी ही सरज़मीं में फिंगर 8 और फिंगर 3 के बीच स्थापित की। गलवान वेली में जहाँ हमारे सैनिकों ने भारत की सरजमीं की सुरक्षा करते हुए शहादत दी, वहाँ पर पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से पीछे हमारी सेना को क्यों हटाया?चीन ने भारत के साथ सार्वजनिक सीमा वार्ता करने का पाखंड करते हुए है, हमारी 1,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल किया है।

चीन के साथ व्यापार बढ़ाया जा रहा है !

मौजूदा तनाव और चीन की धृष्टता के बावजूद चीन 2020 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है।  

प्रधानमंत्री मोदी चीनी एप पर प्रतिबंध लगाने की नौटंकी करते रहे और 2021 के पहले पांच महीनों में ही भारत और चीन के बीच व्यापार में 70 % की वृद्धि हुई।

8 जून को, वित्त मंत्रालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि इंफ्रास्ट्रक्चर में “बोली लगाने वाली कंपनियों पर भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश की संस्थाओं के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की व्यवस्था पर कोई रोक नहीं है”। अब चीनी प्रौद्योगिकी कंपनियां आराम से से उन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में आ सकती हैं जहां पहले रोक थी।  

रक्षा बजट के साथ खिलवाड़ क्यों –

चीन ने इस साल अपने रक्षा बजट में 6.8% की वृद्धि कर 209 बिलियन डॉलर खर्च करने का फैसला किया वहीं दूसरी और मोदी सरकार ने भारत के रक्षा बजट को केवल 1.4% बढ़ाकर 4.78 लाख करोड़ रुपये किया है।

पिछले वित्तीय वर्ष में ही भारतीय सेना ने 20,776 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च किए थे।

मोदी जी की चीन के प्रति आत्मीयता सार्वजनिक है, इस केमिस्ट्री की दलील तो उन्होंने स्वयं दी है। वह भारत के अकेले प्रधानमंत्री हैं जिनकी 18 बार चीन के प्रमुख से वार्ता हुई है। साबरमती के तट पर झूले झूलने से लेकर महाबलीपुरम में गलबहियां करने के बाद क्या मोदी जी देश को बताएंगे कि चीन के साथ निपटने की उनकी रणनीति आखिर क्या है?

 

कुछ सवाल और मांगें जिनका जबाव देश को चाहिए

आखिर 20 जांबाज सैनिकों की शहादत का बदला हम कब और कैसे लेंगे? अप्रैल 2020 की यथावत स्थिति (Status Quo Ante) कब स्थापित होगी?

विस्थापित होने के चार महीने बाद, और कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के दो महीने बाद भी हॉट स्प्रिंग, गोगरा और डेपसांग से चीनी सैनिकों को कब खदेड़ा जाएगा? इसकी क्या नीति है?

इस पर कौन सी बात हो रही है?जिस कैलाश रेंज पर हमारी सेना ने कब्जा किया था और जिससे चीन घबराता था, अपने समझौते में उस रेंज से सेना को हटाने की ऐसी क्या जल्दी थी?पैंगोंग त्सो लेक के उत्तरी छोर पर फिंगर 4 पर हमारी सेना की पोस्ट को फिंगर 3 पर पीछे हटा, बफर ज़ोन अपनी ही सरज़मीं में क्यों बनाया  गया?

गलवान वेली में जहाँ हमारे सैनिकों ने भारत की सरजमीं की सुरक्षा करते हुए शहादत दी, वहाँ पर पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से पीछे हमारी सेना को क्यों हटाया? चीन के साथ अपनी बातचीत में हमने कितनी सख्ती से बलवान घाटी में होने वाले हमले का स्पष्टीकरण और जवाबदेही  मांगी?

क्या चीनियों ने स्वीकार किया कि इसके उल्लंघन के परिणामस्वरूप शांति समझौता टूटा?एक वरिष्ठ मंत्री ने राष्ट्रीय हितों के विपरीत बयान देते हुए भारत को हमलावर के रूप में प्रस्तुत किया, ऐसे अक्षम्य अपराध पर प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं और एक मौजूदा मंत्री द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ क्या यह खिलवाड़ हो सकता है या यह बयान सरकार का अधिकारिक बयान माना जाए?

सरकार ने 2018 में माउंटेन स्ट्राइक कोर को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया?क्या शहीद परिवारों की सहायता के लिए कोई स्थापित नीति है, और क्या इस मामले में इसका ईमानदारी से पालन किया गया? क्या पीएम ने अपने बहुप्रचारित निजी संपर्क का शीर्ष चीनी नेतृत्व के साथ स्पष्टीकरण मांगने के लिए इस्तेमाल किया और अगर नहीं किया तो  इस आत्मीयता का मतलब ही क्या है?

 

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