ज्ञानेन्द्र पाण्डेय: कोविड यानी कोरोना वायरस एक बार फिर उफान पर है। कोविड के इस उफान ने इस महामारी को लेकर यह भ्रम भी ख़त्म कर दिया है, कि इसका वायरस ठण्ड के मौसम और नमी में ज्यादा सक्रिय होता है और इसी मौसम में इसका संक्रमण भी ज्यादा होता है। यह भ्रम या यूँ कहें गलतफहमी इस वजह से भी बनी क्योंकि जब पिछले साल( 2020 में) इस वायरस का पूरी दुनिया में पहली बार प्रकोप हुआ था तब ठण्ड का मौसम था और यह कहा गया था, कि जैसे – जैसे गर्मी का असर बढ़ता जाएगा वैसे – वैसे इस महामारी का असर कम होता जाएगा। पर हुआ इसका उल्टा ही और ठण्ड का मौसम ख़त्म होने के बाद अब जब फिर से गर्मी के मौसम की शुरुआत हुई है , कोरोना एक बार फिर अपने चरम पर है।
देश की राजधानी दिल्ली की ही बात करें तो इस साल अप्रैल महीने की 6 तारीख को कोरोना संक्रमितों की संख्या पांच हजार का आंकड़ा पार कर गई थी। दिल्ली में कोरोना पीड़ितों की यह संख्या उतनी ही थी। जितनी पिछले साल 27 नवम्बर को तब थी जब कोरोना यहाँ अपने चरम पर था। कोरोना रोगियों की इस संख्या को देखते हुए आसानी से कहा जा सकता है कि कोरोना एक बार फिर चरम पर है और उफान पर है। बात केवल दिल्ली की ही नहीं है , दिल्ली समेत देश के करीब दर्जन भर राज्यों के दो दर्जन से अधिक महानगर , शहर और कस्बे कोरोना की इस दूसरी लहर की भयानक लपेट में हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस बार कोरोना सरकार और आम नागरिक की गलतियों और लापरवाहियों की वजह से फैला है। लॉक डाउन के दौर में इसका प्रकोप नियंत्रित हुआ था और हालात सुधरने लगे थे। सुधारते हालातों को देखते हुए ही धीरे – धीरे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन इस पर सही तरीके से अमल न होने की वजह से कोरोना ने एक बार फिर दस्तक दी है। अनलॉक की प्रक्रिया में हुई गलतियों को कई रूपों में भी देखा जा सकता है।
ऐसे में कोरोना के प्रकोप से बचा भी कैसे जा सकता है। एक बार फिर देश के कई राज्यों की सरकारों ने रात का कर्फ्यू लगा दिया है। इस कर्फ्यू से कितना फायदा होगा पता नहीं क्योंकि रात में तो वैसे भी एक प्रतिशत से कम लोग ही घर से बाहर निकलते हैं। आर्थिक दृष्टि से दिन में कर्फ्यू लगाना व्यावहारिक नहीं कहा जा सकता लेकिन भीड़ और रैल्यों पर तो पूरी तरह प्रतिबन्ध लगाया ही जा सकता है, लेकिन ये सब नहीं होगा हिन्दू धार्मिक आयोजनों पर किसी तरह की पाबदियाँ नहीं लगेंगी तो कोरोना पर कैसे नियंत्रण पाया जा सकता है। बहरहाल गलतियाँ चाहे सरकार से हुई हों या फिर आम जनता की लापरवाहियां बढ़ गई हों, कारण चाहे जो भी रहे हों , कोरोना ने एक बार फिर दस्तक तो दे ही दी है। कोरोना की इस दस्तक से देश के कई राज्यों में आने वाले चार हफ्ते बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। चुनौतीपूर्ण इसलिए भी क्योंकि इस बार कोरोना की यह दस्तक तेज मारक क्षमता के साथ हुई है। इसी सन्दर्भ में केंद्र सरकार ने देश की राजधानी दिल्ली के साथ ही राजस्थान और महाराष्ट्र समेत देश के आधा दर्जन बड़े राज्यों में नाइट कर्फ्यू का फैसला लिया गया है।
