विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि सरकार इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के बीच स्थिति पर नजर रख रही है। बागची ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए सरकार के नियोजित अभियान के बारे में बात की, लेकिन साथ ही कहा कि गाजा से नागरिकों की वापसी मुश्किल होगी। अरिंदम बागची ने कहा, “पहले गाजा में लगभग चार भारतीय नागरिक थे। हमारे पास अभी वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सटीक संख्या नहीं है। गाजा में स्थिति तनावपूर्ण है और उनके लिए फिलहाल बाहर आना थोड़ा मुश्किल है। मांग के अनुसार उड़ानों की व्यवस्था की जाएगी।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ”किसी भारतीय के हताहत होने की कोई रिपोर्ट नहीं है। एक भारतीय नागरिक घायल हो गया और वह चिकित्सा देखभाल में है।”
उन्होंने बताया कि सरकार के ‘ऑपरेशन अजय’ के तहत तेल अवीव से पांच उड़ानों में लगभग 1,200 भारतीयों और 18 नेपाली नागरिकों को निकाला गया है।
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बागची ने कहा कि सरकार ने 7 अक्टूबर को “इज़राइल पर भयानक आतंकवादी हमले” की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से निपटने में एक साथ खड़ा होना चाहिए।”
गाजा और फिलस्तीन को मदद के मुद्दे पर अरिंदम बागची ने कहा कि 2000 से 2023 तक भारत ने लगातार फिलस्तीन की मदद की है। 29.5 मिलियन डॉलर की मदद भारत की तरफ से की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के सभी रूपों का मुकाबला करने के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए। हमने इजराइल पर हुए भीषण हमले की कड़ी निंदा की है।
फिलिस्तीन मुद्दे पर अरिंदम बागची ने कहा, “भारत दो-राज्य समाधान के लिए सीधी बातचीत के पक्ष में रहा है।”
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उन्होंने कहा, “फिलिस्तीन के संबंध में, हमने इजरायल के साथ शांति से सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर रहने वाले फिलिस्तीन के एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य राज्य की स्थापना के लिए सीधी बातचीत फिर से शुरू करने की वकालत करने की अपनी दीर्घकालिक स्थिति को दोहराया है।”
बागची ने कहा, “हमने जारी संघर्ष के कारण नागरिक की हो रही मौतों पर भी अपनी चिंता व्यक्त की है। हम मानवीय स्थिति के बारे में भी चिंतित हैं।”
बता दें कि इजराइल-गाजा संघर्ष 14वें दिन में प्रवेश कर गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संघर्ष पर चर्चा करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सहित वैश्विक नेताओं के साथ निजी बैठकें की हैं। दूसरी ओर, मिस्र और जॉर्डन दोनों ने किसी भी फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों को लेने से इनकार कर दिया है। उन्हें डर है कि इज़राइल फ़िलिस्तीनियों को अन्य देशों में निष्कासित करने के लिए मजबूर कर सकता है और राज्य की उनकी मांग को पूरी तरह से अमान्य कर सकता है।
