मानसून सत्र के दूसरे दिन भी संसद की कार्यवाही नही चल पाई। विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में सफाई की मांग पर अडिग है। शुक्रवार सुबह संसद की कार्यवाही शुरू होते ही मणिपुर की स्थिति पर विपक्षी सांसदों ने जबरदस्त हंगामा किया। लगातार हंगामे की वजह से लोकसभा पहले दोपहर 12 बजे तक और फिर दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। वही हाल राज्यसभा में भी देखा गया। मणिपुर मुद्दे पर हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 2:30 बजे तक और फिर दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। मणिपुर मुद्दे पर संसद में हंगामे पर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, ‘दोनों सदनों के अध्यक्ष जब भी निर्देश देंगे हम चर्चा के लिए तैयार हैं।
हंगामें के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार एक बार फिर आश्वस्त कर रही है कि मणिपुर पर चर्चा हो, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा चाहती जी नही है, इसलिए सदन को चलने नही दे रही है।
सिंह ने कहा, ”मणिपुर की घटना निश्चित रूप से बहुत गंभीर है और स्थिति को समझते हुए पीएम ने खुद कहा है कि मणिपुर में जो हुआ उसने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। घटना पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम मणिपुर पर संसद में चर्चा चाहते हैं। मैंने सर्वदलीय बैठक में यह कहा था और मैं संसद में यह दोहराता हूं कि हम मणिपुर पर सदन में चर्चा चाहते हैं। लेकिन मैं देख रहा हूं कि कुछ राजनीतिक दल हैं जो अनावश्यक रूप से यहां ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं ताकि मणिपुर पर चर्चा न हो सके। मैं स्पष्ट रूप से आरोप लगा रहा हूं कि यह विपक्ष मणिपुर पर उतना गंभीर नहीं है जितना उन्हें होना चाहिए था।”
कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “मैंने संसद में सवाल उठाया था लेकिन मौका नहीं दिया गया। सरकार को इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए और हम पीएम मोदी से एक बयान जारी करने की मांग करते हैं… पीएम मोदी ने सदन के बाहर बयान दिया, जबकि उन्हें ऐसा अंदर करना चाहिए था।”
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “विपक्ष चर्चा से बचने और संसदीय कार्यवाही को बाधित करने के लिए कुछ न कुछ बहाने बनाता है। कुछ अब संसद भवन का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वे नहीं चाहते कि संसद आगे चले…विपक्ष संसदीय चर्चा से क्यों भाग रहा है? क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके राजनेता अब संसद की सेवा नहीं कर रहे हैं? या वे अपनी सरकार की खामियों पर चर्चा से बचने की कोशिश कर रहे हैं?” .
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, “पिछले 77-78 दिनों से मणिपुर में अराजकता का माहौल है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वहां सरकार और प्रशासन जैसा कुछ नहीं है। इस संदर्भ में, जब संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ – तो क्या संसद के पटल पर बयान देना पीएम का कर्तव्य नहीं था? … इसलिए, विपक्ष ने मांग की है कि इस मामले पर स्थगन के तहत लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा की जाए।”
केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, “मैं विपक्ष से अपील करना चाहूंगा कि वे बार-बार अपना रुख न बदलें और राजनीति में शामिल न हों क्योंकि यह महिलाओं की गरिमा, उत्तर-पूर्व और सीमावर्ती राज्य से जुड़ा एक बहुत ही संवेदनशील मामला है… मुझे लगता है कि संसद सत्र चलना चाहिए क्योंकि हम इस मुद्दे पर चर्चा करने और चर्चा करने के लिए तैयार हैं।”
मालूम हो कि 11 अगस्त को समाप्त होने वाले मानसून सत्र के दौरान संसद के समक्ष 32 प्रमुख विधेयक पेश किए जाएंगे। विपक्ष सत्र के दौरान मणिपुर हिंसा और दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं के नियंत्रण पर अध्यादेश सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है।
