सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बलों को तैनात करने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) की भी खिंचाई की और कहा कि चुनाव कराना हिंसा का लाइसेंस नहीं हो सकता है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना राज्य चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट पंचायत चुनाव में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।
Supreme Court dismisses the plea challenging the Calcutta High Court's order regarding the deployment of central forces in panchayat elections in West Bengal, refuses to interfere with the HC order. pic.twitter.com/t2ostlP9sP
— ANI (@ANI) June 20, 2023
शीर्ष अदालत ने कहा, “उच्च न्यायालय के आदेश के आदेशों में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। केंद्रीय बलों को राज्य में तैनात किया जा सकता है। पंचायत चुनावों में केंद्रीय बलों की तैनाती के उच्च न्यायालय के आदेश में कोई गलत नहीं है।”
शीर्ष अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, “हाई कोर्ट ने जो सोचा हो सकता है कि अन्य पड़ोसी राज्यों से बलों की आवश्यकता के बजाय केंद्रीय बलों को तैनात करना बेहतर होगा और खर्च केंद्र द्वारा वहन किया जाएगा।”
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि अभी वहां ग्राउंड सिचुएशन क्या है? सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि 8 जुलाई को चुनाव होना है। आज नाम वापस लेने की आखिरी तारीख है। राज्य भर में 189 मतदान केंद्र संवेदनशील हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि हम सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से तैयार हैं।
जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि हाईकोर्ट ने ये आदेश इसलिए दिया कि राज्य में 2013 और 2018 मे हुए चुनाव के दौरान हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। हिंसा के माहौल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं कराए जा सकते. चुनाव तो निर्भय, निष्पक्ष और स्वतंत्र होने चाहिए।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर लोगों को इस बात की भी आजादी नहीं है कि वो नामंकन पत्र दाखिल कर पाएं क्योंकि उनकी हत्या हो रही है तो फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बात का सवाल ही नहीं उठता। हाई कोर्ट ने हिंसा की ऐसी तमाम घटनाओं के मद्देनजर ही ऐसा आदेश पास किया होगा।
राज्य चुनाव आयोग की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा, “हम इस तथ्य से अवगत हैं कि मतदान से पहले चुनाव प्रचार की अवधि होगी। हमें राज्य से आवश्यक बलों के लिए अनुरोध करना होगा। हमने कंपनियों को तैनात करने के लिए कहा है।”
अरोड़ा ने कहा कि संवेदनशील बूथ की पहचान की जा रही है। यह कहना गलत है कि चुनाव आयोग ने अब तक कुछ नहीं किया। बंगाल सरकार ने कहा कि यह निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार के परामर्श से राज्य चुनाव आयोग सिफारिश करता है। उस पर कोई निर्णय थोपा नहीं जा सकता।
इस पर जवाब देते हुए कोर्ट ने कहा, “निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। चुनाव आयोग इस आदेश से कैसे व्यथित है? फोर्सेज कहां से आते हैं, यह राज्य चुनाव आयोग का विषय नहीं है, फिर याचिका कैसे विचारणीय है?”
इस बीच, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और वे इसके लिए पर्याप्त फोर्स उपलब्ध कराएंगे।
इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 13 जून को चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल में आगामी पंचायत चुनावों के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात करने का निर्देश दिया था। 15 जून को हाईकोर्ट ने आयोग को 48 घंटे के भीतर राज्य के सभी जिलों के लिए केंद्रीय बलों की मांग करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने संयुक्त रूप से शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली में लगभग 75,000 सीटों के लिए मतदान 8 जुलाई को होगा, जिसकी मतगणना 11 जुलाई को होनी है। लगभग 61,000 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
बता दें कि राज्य में पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान हिंसा और आगजनी की कई घटनाएं हुई हैं और अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है।
