वाराणसी में कला मेला का हुआ उदघाटन, पूर्वांचल पर फोकस, कलाकारों की कलाकृति आपके मन को मोह लेगी

बुधवार को राज्य ललित कला अकादमी लखनऊ की ओर से क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी एवं ललित कला विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित कला मेला का उद्घाटन हुआ। विभाग के सभागार में विश्वविद्यालय के कुलपति और कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी ने दीप प्रज्वलित कर कला मेला का शुभारंभ किया।

इस मौके पर प्रोफेसर त्यागी ने कहा कि कला को देखने और समझने के लिए दो भेद किए जाते हैं प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष। प्रत्यक्ष वस्तु सबको दिखता है, और अप्रत्यक्ष वस्तु हमारे मस्तिष्क के अंदर होती है। कलाकार अपने मस्तिष्क से अपनी शब्दों से जो बातें नहीं कह पाते है, उसे चित्रों के माध्यम से व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि एक बंद कमरे में अपनी बात नहीं कही जा सकती । कला का उद्देश्य यही होना चाहिए कि समाज का कोई व्यक्ति अछूता ना रहे। उन्होंने प्रदर्शित कलाकृतियों को अपनी शुभकामना दी और कहा कि मानवीय मस्तिष्क को इतना ऊंचाई तक ले जाइए कि विश्वविद्यालय के साथ बनारस का भी नाम ऊंचा हो सके।

मालूम हो कि, राज्य ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कला प्रदर्शनी में पूर्वांचल के जिले के संबंधित कलाकारों की कलाकृति प्रदर्शित की गई है।प्रदर्शनी में कला संस्कृति,काकोरी कांड, साधू, बुद्ध, प्रकृति चित्रण, लोक कला एवं मूर्तिकला के अंतर्गत ब्रांच,सिरेमिक, मिक्स सामग्री द्वारा बनाई गई कलाकृति प्रदर्शित की गई है। विभाग परिसर के मैदान में इंस्टॉलेशन आर्ट का भी प्रदर्शन किया गया है जिसमें ध्यान मुद्रा में योगी, जलपरी, इंडिया गेट, G-20 सम्मेलन इत्यादि का भी प्रदर्शन किया गया है।

कला मेला में 18 कला स्टाल एवं 5 फूड स्टॉल लगाए गए हैं। कला मेला में विश्वविद्यालय से संबंधित महाविद्यालय गंगापुर परिसर, जीवनदीप महाविद्यालय, एन.टी.पी.सी. शक्तिनगर, धीरेंद्र महिला महाविद्यालय, एवं लिटिल फ्लावर स्कूल के इंस्टॉल पर कलाकृति प्रदर्शित की गई है।

कला मेला के अवसर पर सांध्य कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। इस कार्यक्रम में सोनाली और अंकिता द्वारा कुलगीत प्रस्तुत किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर एस.प्रणाम सिंह एवं विशिष्ट अतिथि श्री वेद प्रकाश मिश्रा कों अंग वस्त्रम देकर विभागाध्यक्ष डॉ सुनील कुमार विश्वकर्मा ने सम्मानित किया।

कार्यक्रम के शुरुआत में अभिजीत चक्रवर्ती द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना एवं लखनऊ घराने के तीन ताल तराना की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। छात्रा देवयानी राय के डांस एवं शैलजा गुप्ता के मराठी गाने के प्रस्तुति पर छात्र -छात्राएं झूमने पर मजबूर हो गए। इस कार्यक्रम में पी.जी.डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग के छात्राओं ने नव दुर्गा के नौ रूपों को अपने द्वारा बनाए गए डिजाइन के माध्यम से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में श्रीधर शर्मा द्वारा कृष्ण की दीवानगी मीरा प्रस्तुत की गई।

इस अवसर पर सर्वश्री विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर अमिता सिंह, प्रोफेसर रामाश्रय यादव,प्रोफेसर राजमणि, प्रोफेसर एस.प्रणाम सिंह, प्रेमचंद विश्वकर्मा, प्रोफेसर के.के.सिंह डॉ शत्रुघ्न प्रसाद, डॉक्टर राम राज, डॉ स्नेह लता कुशवाहा, सुश्री शालिनी कश्यप, डॉक्टर ओम प्रकाश गुप्ता, डॉ कविता आर्य, डॉ शशिकांत नाग,डॉ विजय रंजन, डॉक्टर सुभ्रा वर्मा,डॉक्टर सतीश कुशवाहा, डॉ शशिकांत महाविद्यालय के प्रबंधक कीर्ति भूषण सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुनील कुमार विश्वकर्मा ने किया।

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