कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी, कहा- ज्वलंत मुद्दों पर चुनाव आयोग शांत है; जो समस्याएं हैं ही नहीं, उसका निदान ढूँढा जा रहा है

कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय चुनाव आयोग को पत्र लिख कर उनके द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों पर सवाल उठाया है। यह पत्र कांग्रेस नेता और पार्टी के प्रवक्ता जयराम रमेश द्वारा लिखी गई है। इस पत्र में पार्टी ने चुनाव आयोग के काम करने के तरीके पर सवाल उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार उत्तर प्रदेश मे अपने दिए एक भाषण में ‘रेवड़ी’ शब्द का इस्तेमाल किया था। लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि चुनाव आयोग ने उस समय के बहुत बाद जाकर इस ‘रेवड़ी’ और फ्रीबीज जैसे शब्दों का संज्ञान लिया और देश के राजनीतिक दलों से इनके प्रयोग किए जाने को लेकर उनसे जवाब मांगा।

इस पत्र में आगे लिखा गया है कि इस मामले में चुनाव आयोग का जो रुख रहा है या फिर जिस तरीके से चुनाव आयोग इस मामले को लेकर हरकत में आया है, वो सवाल खड़े करता है। और ये सवाल चुनाव आयोग के साख, उनकी विश्वसनीयता को लेकर उठ रहा है।

जयराम रमेश ने पत्र में लिखा है कि फ्रीबीज पर जो चर्चा हो रही है, वो गलत दिशा में जा रही है। हम सभी एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं, यहाँ जनता सर्वोपरि है। ऐसी किसी भी चर्चा के विषय में फैसला जनता के बुद्धि और विवेक पर छोड़ देना चाहिए, फिर वो ‘रेवड़ी’ की बात हो या कुछ और।

चिट्ठी में आगे लिखा गया है कि देश में जो समस्याएं हैं ही नहीं, उसका निदान ढूंढा जा रहा है और ज्वलंत समस्याओं पर निर्वाचन आयोग चुप्पी साढ़े बैठा है।

पत्र में सवाल उठाते हुए कहा गया है कि, ‘ये फ्रीबीज या रेवड़ी है क्या?’। देश में जिस तरह से बेरोजगारी है, महंगाई से लोग जूझ रहे हैं, लोगों की आय कम है, ऐसे लोगों के लिए अगर कुछ किया जाता है तो क्या इसे रेवड़ी कहते हैं?। और अगर यही रेवड़ी है तो फिर ये बताइये कि ‘जब आप अमीरों का 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ माफ करते हैं’ तो वह क्या है?।

कांग्रेस ने अपने इस पत्र के माध्यम से कहा है कि चुनाव आयोग द्वारा ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर राजनीतिक दलों से जो सुझाव मांगे गए थे, उस पर कांग्रेस पार्टी ने आयोग को अपना सुझाव भेज दिया है। पार्टी ने चुनाव आयोग से कहा है कि ऐसी चीज़ों पर फैसला लोकतंत्र में जनता पर छोड़ देना चाहिए।

पत्र में आगे कहा गया है, अनुच्छेद 324 के अनुसार ‘फ्री एंड फेयर’ चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, ये उनका काम है। लेकिन पार्टियां लोगों से क्या वादा करती हैं और लोग उससे कितना प्रभावित होकर वोट करते हैं- इसको लेकर हमारे पार्टी का मानना है कि, ये चुनाव आयोग के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है।

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