‘सिख फॉर जस्टिस’ संगठन पर लगे प्रतिबंध को केंद्र सरकार ने 5 साल के लिए बढ़ाया

केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत खालिस्तानी समर्थक सिख्स फॉर जस्टिस पर प्रतिबंध को पांच साल के लिए बढ़ा दिया है।अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा की गई जांच में मिले नए सबूतों के आधार पर लिया गया है।

सिख फॉर जस्टिस गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा संचालित एक अमेरिकी-आधारित समूह है, जिसे 1 जुलाई, 2020 को भारत सरकार द्वारा ‘नामित व्यक्तिगत आतंकवादी’ घोषित किया गया था।

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एनआईए ने सिख फॉर जस्टिस और गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए हैं।

पिछले साल जांच एजेंसी ने पन्नू की पंजाब और चंडीगढ़ स्थित संपत्तियों को भी अपने कब्जे में ले लिया था।

इससे पहले, केंद्र ने खालिस्तान के मुद्दे का खुले तौर पर समर्थन करने और भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देने के लिए जुलाई 2019 में सिख फॉर जस्टिस पर प्रतिबंध लगा दिया था।

एसएफजे अपने अलगाववादी एजेंडे के तहत सिख जनमत संग्रह पर भी जोर देता है।

इससे पहले मई महीने में खबर आई थी कि दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने उन आरोपों की एनआईए जांच की सिफारिश की है जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप सरकार को अमेरिका स्थित प्रतिबंधित खालिस्तानी समूह ‘सिख फॉर जस्टिस’ से फंडिंग मिली थी। हालांकि आप नेता और दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आरोपों का जोरदार खंडन किया और कहा कि यह केजरीवाल के खिलाफ “एक और साजिश” है।

उपराज्यपाल सचिवालय के अनुसार, सक्सेना को शिकायत मिली थी कि आप को 1993 के दिल्ली विस्फोटों के दोषी और आतंकवादी देवेंद्र पाल भुल्लर की रिहाई की सुविधा देने और खालिस्तानी समर्थक भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए खालिस्तानी समर्थक समूहों से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले थे।

उपराज्यपाल ने गृह मंत्रालय को जनवरी 2014 में केजरीवाल द्वारा इकबाल सिंह को लिखे गए एक पत्र का भी हवाला दिया था, जिसमें उल्लेख किया गया था कि “आप सरकार पहले ही राष्ट्रपति से भुल्लर की रिहाई की सिफारिश कर चुकी है और एसआईटी के गठन सहित अन्य मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक और समयबद्ध तरीके से काम करेगी।”

शिकायत में सिख्स फॉर जस्टिस के प्रमुख और वांछित खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा जारी एक वीडियो का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि AAP को 2014 और 2022 के बीच खालिस्तानी समूहों से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले।

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