भारत ने संयुक्त राष्ट्र में सीएए, राम मंदिर पर टिप्पणी के लिए पाकिस्तान को लगाई फटकार

संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्लामाबाद के राजदूत द्वारा अयोध्या में राम मंदिर और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का मुद्दा उठाने के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। शुक्रवार को यूएनजीए की पूर्ण बैठक के दौरान पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम द्वारा की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा कंबोज ने कहा कि पड़ोसी देश सीमित और गुमराह दृष्टिकोण के साथ दुखद रूप से स्थिर बना हुआ है।

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अकरम ने अयोध्या में राम मंदिर के अभिषेक के साथ-साथ सीएए के हालिया कार्यान्वयन का संदर्भ दिया, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों – हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई – को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान करेगा।

कंबोज ने कहा, “मेरे देश से संबंधित मामलों पर इस प्रतिनिधिमंडल के सीमित और गुमराह दृष्टिकोण को देखना वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है, खासकर तब जब महासभा एक ऐसे मामले पर विचार करती है जो संपूर्ण सदस्यता से ज्ञान, गहराई और वैश्विक दृष्टिकोण की मांग करता है – शायद यह इस प्रतिनिधिमंडल की विशेषता नहीं है।”

कंबोज ने यहूदी-विरोध, ‘ईसाईफोबिया’ और इस्लामोफोबिया (इस्लाम के प्रति पूर्वाग्रह) से प्रेरित सभी कृत्यों की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह स्वीकार करना जरूरी है कि इस तरह का ‘फोबिया’ (पूर्वाग्रह) अब्राहिमी धर्मों से परे भी फैला हुआ है। उन्होंने प्रस्ताव के बारे में भारत के रुख को लेकर स्पष्टीकरण में कहा, ‘स्पष्ट साक्ष्यों से पता चलता है कि दशकों से, गैर-अब्राहिमी धर्मों के अनुयायी भी धार्मिक पूर्वाग्रह से प्रभावित हुए हैं। इससे विशेष रूप से हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी और सिख विरोधी धार्मिक पूर्वाग्रह के समकालीन रूपों का उदय हुआ है।’

कंबोज ने कहा, ‘इस्लामोफोबिया का मुद्दा निस्संदेह महत्वपूर्ण है, लेकिन हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि अन्य धर्म भी भेदभाव और हिंसा का सामना कर रहे हैं। अन्य धर्मों के सामने आने वाली समान चुनौतियों की उपेक्षा करके केवल इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए संसाधनों का आवंटन अनजाने में बहिष्कार व असमानता की भावना को कायम रख सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘यह स्वीकार करना जरूरी है कि दुनियाभर में 1.2 अरब से अधिक अनुयायियों वाला हिंदू धर्म, 53.5 करोड़ से अधिक अनुयायियों वाला बौद्ध धर्म और तीन करोड़ से अधिक अनुयायियों वाला सिख धर्म, सभी धार्मिक पूर्वाग्रह की चुनौती का सामना कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम एक धर्म के बजाय सभी धर्मों के प्रति धार्मिक पूर्वाग्रह की व्यापकता को स्वीकार करें।’

भारतीय राजदूत की टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘इस्लामोफोबिया से निपटने के उपायों’ पर एक प्रस्ताव पर भारत की स्थिति को स्पष्ट करते हुए एक बयान देते समय की गई थी।

शुक्रवार को 193 सदस्यीय महासभा ने पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव ‘इस्लामोफोबिया से निपटने के उपाय’ को मंजूरी दी। 115 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, किसी ने भी विरोध नहीं किया और भारत, ब्राजील, फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूक्रेन और ब्रिटेन सहित 44 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया।

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