समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ वैचारिक मतभेद का हवाला देते हुए, स्वामी प्रसाद मौर्य ने राष्ट्रीय महासचिव के पद से इस्तीफा देने के ठीक एक हफ्ते बाद अब पार्टी भी छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ‘समाजवादी विचारधारा’ के खिलाफ जा रहे हैं। उन्होंने एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित अपना इस्तीफा भी पोस्ट किया।
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मौर्य ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को लिखे पत्र में कहा, ‘‘आपके नेतृत्व में सौहार्दपूर्ण वातावरण में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ किंतु 12 फरवरी को हुई वार्ता और 13 फरवरी को प्रेषित पत्र पर किसी भी प्रकार की वार्ता के लिए पहल नहीं करने के परिणामस्वरूप मैं समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी त्याग पत्र दे रहा हूं।”
विधान परिषद के सभापति को लिखे पत्र में मौर्य ने कहा, ‘‘मैं सपा के प्रत्याशी के रूप में विधानसभा, उप्र निर्वाचन क्षेत्र से सदस्य, विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुआ। चूंकि मैंने सपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है, इसीलिए नैतिकता के आधार पर विधान परिषद, उप्र की सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहा हूं।’’
अपने इस्तीफे के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का कारण ‘अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी से वैचारिक मतभेद’ बताया।
मौर्य ने कहा, “मैं स्वच्छ राजनीति में विश्वास रखता हूं। अलग होने का कारण वैचारिक मतभेद है। मेरे अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी (सपा) से वैचारिक मतभेद रहे हैं। मैंने अखिलेश यादव को देखा, वह समाजवादी विचारधारा के खिलाफ जा रहे थे। मेरे पास मुलायम सिंह यादव के साथ भी काम करने का अनुभव है। वह कट्टर समाजवादी नेता थे। जो लोग उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, वे उनकी विचारधारा पर नहीं चल पा रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा देने पर मौर्य ने कहा कि वह बिना किसी पद के समाजवादी पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे।
राज्य विधान परिषद के सदस्य मौर्य 2022 के चुनावों से पहले भाजपा से समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे और फाजिलनगर से विधानसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन असफल रहे।
उन्होंने रामचरितमानस और अयोध्या मंदिर प्रतिष्ठा समारोह को लेकर विवादित बयान दिया था।
