सीएम योगी ने पूछा, ज्ञानवापी के अंदर त्रिशूल क्या कर रहा है?, कहा- ‘ इस मुद्दे का समाधान मुसलमानों की तरफ से आना चाहिए’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले के बारे में बात की और पूछा कि मस्जिद परिसर में एक त्रिशूल क्या कर रहा था? उन्होंने कहा कि मुस्लिम याचिकाकर्ताओं को इस ऐतिहासिक गलती को ठीक करने के संकल्प के साथ आगे आना चाहिए। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक साक्षात्कार में, आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रयास कर रही है।

योगी ने कहा कि ज्ञानव्यापी में त्रिशूल का होना, देव प्रतिमाओं का होना, दीवारें और साक्ष्य चिल्ला चिल्ला कर सच कह रही है। अगर उसे मस्जिद कहेंगे तो फिर विवाद होगा, लेकिन त्रिशूल को मस्जिद में हमने तो नहीं रखा ना। ये मुस्लिम समाज की तरफ से आना चाहिए कि ऐतिहासिक गलती हुई है। मुस्लिम समाज से इस गलती के लिए समाधान हेतु प्रस्ताव आना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “देश संविधान से चलेगा, मत और मजहब से नहीं। देखिए मैं ईश्वर का भक्त हूं, लेकिन किसी पाखंड में विश्वास नहीं करता। आप मत और मजहब अपने तरीके से होगा। अपने घर में होगा। आपके मस्जिद, इबादतगाह तक होगा। सड़क पर प्रदर्शन करने के लिए नहीं और आपको किसी दूसरे पर नहीं थोप सकते हैं। देश में किसी को रहना है, तो उसे राष्ट्र को सर्वोपरि मानना होगा अपने मत और मजहब को नहीं।

योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी जोरदार निशाना साधा। सीएम योगी ने कहा, मैं 6 साल से ज्यादा समय से यूपी का सीएम हूं। वहां पिछले 6 साल में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। बड़ी बड़ी बात करने वाले ये लोग देखें तो कैसे चुनाव होने हैं। यूपी के चुनाव देखिए और पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव हुए, क्या हाल हुआ। वे लोग पश्चिम बंगाल बनाना चाहते हैं देश को। जिस तरह से वहां टीएमसी सरकार ने किया। कुछ लोग सत्ता में आकर जबरन पूरी व्यवस्था को कैद कर देना चाहते हैं। ये पश्चिम बंगाल में देखने को मिला। विरोधी दलों के कार्यकर्ताओं को मारा गया। ये चीजें आंखों को खोलने वाली हैं। इस मसले पर तो कोई बोलता तक नहीं है। 1990 में कश्मीर में जो कुछ हुआ, ये सब लोग मौन रहे।

मालूम हो कि यूपी सीएम का साक्षात्कार ऐसे समय आया है जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय वाराणसी जिला अदालत के आदेश के खिलाफ एक याचिका पर फैसला सुनाने वाला है, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को यह निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है कि क्या ज्ञानवापी मस्जिद एक मंदिर पर बनाई गई थी। कोर्ट ने 3 अगस्त तक अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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