भारत और मिस्र के बीच संबंधों को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने रविवार को कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने के साथ व्यापक बातचीत की। विदेश सचिव विनय क्वात्रा के अनुसार चार समझौता ज्ञापनों और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें भारत और मिस्र के बीच रणनीतिक साझेदारी पर सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक समझौता शामिल है।
विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के मिस्र दौरे के दौरान 4 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा कृषि क्षेत्र, स्मारकों की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की पूरी श्रृंखला पर चर्चा की और इस बात का भी जायजा लिया कि क्षेत्र और दुनिया के महत्वपूर्ण मुद्दों पर क्या हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर 2023 में होने वाले G-20 शिखर सम्मेलन के लिए मिस्र के राष्ट्रपति को निमंत्रण भी दिया।”
रणनीतिक साझेदारी पर समझौते के अलावा, भारत और मिस्र ने कृषि और संबद्ध क्षेत्र, स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण एवं प्रतिस्पर्धा कानून पर पर भी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
अपनी मिस्र यात्रा के बारे में बताते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “मिस्र की मेरी यात्रा ऐतिहासिक थी। इससे भारत-मिस्र संबंधों में नई ताकत आएगी और हमारे देशों के लोगों को फायदा होगा।”
पीएम मोदी ने ट्विटर पर अपने मिस्र के समकक्ष मुस्तफा मैडबौली के साथ पिरामिडों की अपनी यात्रा की झलकियाँ साझा कीं। उन्होंने लिखा, “हमने अपने राष्ट्रों के सांस्कृतिक इतिहास और आने वाले समय में इन संबंधों को कैसे गहरा किया जाए, इस पर गहन चर्चा की।”
इसके अलावा उन्होंने मिस्र के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से सम्मानित होने पर भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “मैं इस सम्मान के लिए मिस्र की सरकार और लोगों को धन्यवाद देता हूं। यह भारत और हमारे देश के लोगों के प्रति उनकी गर्मजोशी और स्नेह को दर्शाता है।”
इससे पहले पीएम मोदी ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इन सैनिकों ने मिस्र में प्रथम विश्व युद्ध में अपनी जान गंवाई थी। पीएम मोदी ने कहा, “भारत के बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि, जिनके साहस को कभी नहीं भुलाया जाएगा।”
मालूम हो कि हेलियोपोलिस में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मिस्र और फिलिस्तीन के लिए लड़ते हुए शहीद हुए भारतीय सेना के लगभग 4,000 सैनिकों के स्मारक बनाए गए हैं। कब्रिस्तान के प्रवेश द्वार पर हेलियोपोलिस पोर्ट टेवफिक मेमोरियल है, जो बहादुर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि के रूप में बनाया गया है। हालांकि पोर्ट टेवफिक का मूल स्मारक 1970 के दशक में इजरायल-मिस्र संघर्ष के दौरान नष्ट हो गया था।
पीएम मोदी अल हकीम मस्जिद भी गए। ये मिस्र की राजधानी काहिरा में स्थित है और साल 990 में फातिमी खलीफा अल-अजीज बी-इलाह निजार ने इसकी नींव रखी थी। यह साल 1013 में अल-अजीज बी-इलाह निजार के बेटे अल-हकीम के शासनकाल के दौरान बनकर तैयार हुई थी। इसका पुनरुद्धार बोहरा समुदाय के सहयोग से किया गया था।
विनय क्वात्रा के अनुसार, भारत और मिस्र के बीच हस्ताक्षरित एमओयू और समझौतों में राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, रक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश संबंध, वैज्ञानिक और शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने और संबंधों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
राष्ट्रपति सिसी के निमंत्रण पर पीएम मोदी मिस्र के दौरे पर थे। इस साल जनवरी में राष्ट्रपति अल-सिसी जब भारत यात्रा पर थे, तभी वे दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने पर सहमत हुए थे। पीएम मोदी की इस यात्रा को लेकर कहा जा रहा है कि भारत और मिस्र अपने संबंधों के सभी पहलुओं को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में मिस्र को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी 5 दिवसीय यूएस के राजकीय दौरे और मिस्र के दौरे के बाद भारत लौट चुके हैं। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता एयरपोर्ट पर उपस्थित रहें। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने जेपी नड्डा से पूछा कि यहां सब कुछ कैसा चल रहा है, इस पर नड्डा ने उन्हें बताया कि पार्टी के नेता हमारी सरकार के 9 सालों की रिपोर्ट कार्ड के साथ लोगों तक पहुंच रहे हैं और देश खुश है।”
