हिंसा प्रभावित राज्य मणिपुर की स्थिति पर चर्चा के लिए शनिवार शाम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में विपक्षी दलों ने कहा कि पिछले 50 दिनों से हिंसा झेल रहे मणिपुर को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है जो एकजुट हो और लोगों को मरहम लगाने का मौका देने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को राज्य का दौरा करना चाहिए।
बैठक में भाजपा, कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस, मिजो नेशनल फ्रंट, बीजेडी, एआईएडीएमके, डीएमके, राजद, समाजवादी पार्टी, आप समेत कई पार्टियां शामिल हुईं।
कांग्रेस पार्टी ने इस बैठक को सिर्फ औपचारिकता बताया। कांग्रेस ने कहा कि सरकार द्वारा यह बैठक सिर्फ समाचारों की हेडलाइन बनाने के लिए रखी गई थी। कांग्रेस पार्टी की तरफ से सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए मणिपुर के सीएलपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह को तीन घंटे की बैठक में सिर्फ सात मिनट बोलने का समय दिया गया, जो मणिपुर का अपमान है। कांग्रेस पार्टी ने कहा कि एन बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री रहते मणिपुर में शांति की कोई संभावना नहीं है, इसलिए एन बीरेन सिंह का तुरंत इस्तीफा लिया जाए। प्रधानमंत्री मोदी मणिपुर हिंसा को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ें।
सूत्रों के मुताबिक, मणिपुर मुद्दे पर सरकार की ओर से आगे की रणनीति पर एक प्रेजेंटेशन दिया गया। इसमें भौगोलिक और ऐतिहासिक सन्दर्भ शामिल था लेकिन इसका कोई उचित समाधान नहीं दिया गया। सूत्रों ने बताया कि बैठक में एन बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग एक सर्वसम्मत कॉल नहीं थी – केवल समाजवादी पार्टी और राजद ने इसे उठाया।
सरकार ने कहा कि गृह राज्य मंत्री ने राज्य में 20 दिन बिताए और साथ ही कहा कि अपने घरों को छोड़कर जाने वालों के लिए राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
बैठक में DMK ने महिला आयोग की स्थापना का सुझाव दिया, जबकि कांग्रेस ने जोर दिया कि फाॅर्स का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए ताकि लोग अलग-थलग महसूस न करें। लगभग सभी लोग सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के राज्य का दौरा करने पर सहमत हुए। सरकार ने कहा कि वे इस पर गौर करेंगे।’
भाजपा नेता संबित पात्रा ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने अपने प्रतिनिधि भेजे थे। सभी राजनीतिक दलों ने अपने विषयों को सकारात्मक तरीके से रखा। सभी प्रतिनिधियों को सुनने के बाद गृह मंत्री ने विपक्षी दलों के सुझावों पर चर्चा करने का आश्वासन दिया है। सभी राजनीतिक दलों के मौजूद प्रतिनिधि मंडल ने भी माना कि आज से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई गृह मंत्री 3 दिन दंगे वाली जगह बिताकर आया हो। पात्रा ने कहा कि अमित शाह ने कहा है कि पीएम मोदी को हर दिन स्थिति से अवगत कराया गया। म्यांमार सीमा पर 10 किमी लंबी बाड़ लगाई गई है, जहां से लोग अवैध रूप से देश में प्रवेश कर रहे थे। और काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि, “मणिपुर में अधिकांश युवाओं ने अपने हथियार पुलिस को सौंप दिए हैं। हमने सभी पक्षों से सुझाव लिये हैं और सही दिशा में कदम उठाये जायेंगे।”
शिवसेना (उद्धव) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुवेर्दी ने कहा, ”हमने छात्रों की पढ़ाई बाधित होने और अन्य संवेदनशील मुद्दे उठाए। अब तक केंद्र ने कुछ भी रचनात्मक नहीं किया है लेकिन हमने अगले सप्ताह एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के राज्य का दौरा करने की मांग की है।”
RJD सांसद मनोज झा ने कहा, ‘खुले मन से बात हुई हम सबने अपनी राय रखी। वहां की राजनीतिक नेतृत्व में (लोगों का) अविश्वास है और यह बात सारे विपक्षी दलों ने रखी। हमने कहा कि जो इंसान प्रशासन चला रहा है उसमें कोई विश्वास नहीं है। अगर आपको शांति बहाल करनी है तो आप ऐसे व्यक्ति के रहते नहीं कर सकते।’
DMK सांसद तिरुचि शिवा ने बताया कि हमने मणिपुर को लेकर अपनी चिंताएं रखी हैं। 100 लोग मारे गए हैं और करीब 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। इस पर सबसे दुखद यह है कि प्रधानमंत्री ने इस पर एक शब्द तक नहीं कहा। वहां की स्थिति का अच्छे से पता लगाने के लिए एक सर्वदलीय दल को मणिपुर भेजना चाहिए। गृह मंत्री ने हमें आश्वासन दिया है।
तृणमूल कांग्रेस ने अगले सप्ताह मणिपुर में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की भी मांग की है और कहा है कि आजादी के बाद से ऐसी स्थिति कभी नहीं हुई है। पार्टी ने कहा, “मणिपुर के लोगों का विश्वास बढ़ाने और उन्हें राहत देने के लिए तृणमूल कांग्रेस अगले सप्ताह राज्य में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की मांग करती है। केंद्र सरकार मणिपुर संकट को नजरअंदाज कर रही है। इसे ठीक करने, देखभाल करने, शांति और सद्भाव बहाल करने के लिए बदलने की जरूरत है।”
ममता बनर्जी की पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि अमित शाह के दौरे से मणिपुर में हालात खराब हुए। क्या केंद्र सरकार मणिपुर को कश्मीर बनाने की कोशिश कर रही है? इसे पहले अपनी विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए और तुरंत सही कदम उठाना चाहिए।”
हालाँकि, कांग्रेस ने पूर्वोत्तर राज्य में संकट को लेकर भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री को करनी चाहिए थी, जिन्होंने पिछले 50 दिनों में मणिपुर पर एक भी शब्द नहीं कहा है। कांग्रेस के ओकराम इबोबी सिंह ने कहा, “यह सर्वदलीय बैठक बेहतर होती अगर इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते और यह इंफाल में होती। इससे मणिपुर के लोगों को स्पष्ट संदेश गया होगा कि उनका दर्द और संकट राष्ट्रीय पीड़ा का विषय है।”
बैठक के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “2001 में जून के महीने में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब मणिपुर जल रहा था। उसके बाद मणिपुर अमन, शांति और विकास के रास्ते पर लौट आया उसका प्रमुख कराण है कि ओकरम इबोबी सिंह(मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री) ने 15 साल वहां स्थिर सरकार दी। 3 मई से हम मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री इसपर कुछ बोलें।”
रमेश ने आगे कहा कि बेहतर होता कि सर्वदलीय बैठक इंफाल में होती जिससे एक संदेश जाता कि मणिपुर की पीड़ा देश की पीड़ा है। वहां अलग-अलग मिलिटेंट ग्रुप हैं जिनके पास हथियार हैं। हमारी मांग है कि बिना किसी भेदभाव के सारे मिलिटेंट ग्रुप से हथियार वापस लिए जाएं। जब तक एन. बीरेन सिंह मुख्यमंत्री रहेंगे तब तक मणिपुर में परिवर्तन की संभावना नहीं है, उनसे इस्तीफा लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकारा है कि मैं स्थिति को संभाल नहीं पाया, ऐसे हालात में उनका मुख्यमंत्री रहना नामुमकिन है।
मालूम हो कि 3 मई को मणिपुर में जातीय झड़पें शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 120 लोगों की मौत हो गई है और 3,000 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। यश हिंसा तब हुई थी जब मेइतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) की स्थिति की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों 3 में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किया गया था। अमित शाह ने पिछले महीने राज्य का चार दिनों का दौरा किया था और राज्य में शांति बहाल करने के लिए राज्य के लोगों से बातचीत की थी। विपक्षी दल पूर्वोत्तर राज्य में स्थिति से निपटने के तरीके को लेकर केंद्र की आलोचना कर रहे हैं क्योंकि लगभग 50 दिनों से हिंसा जारी है।
