प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बालासोर में दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें घटना की जानकारी दी। पीएम के साथ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहे और साथ ही रेलवे के तमाम आला अधिकारी भी प्रधानमंत्री के साथ मौके पर मौजूद थे। शुक्रवार शाम यहां तीन ट्रेनों की टक्कर हो गई थी। ट्रेन दुर्घटना के स्थान पर बचाव अभियान समाप्त हो गया है और बहाली का काम चल रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक, रेल हादसे में अब तक 261 लोगों की मृत्यु हो गई है और 900 लोगों के घायल होने की सूचना है।
इस ट्रेन हादसे में तीन ट्रेनें शामिल रही हैं। ये हादसा तब हुआ, जब चेन्नई जा रही कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई और ये बगल में खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। इस वजह से कोरोमंडल एक्सप्रेस की पिछली बोगियां तीसरे ट्रैक पर जा पहुंची। वहीं, उसी दौरान दूसरी तरफ से आ रही बेंगलुरू-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस पटरी से उतरी बोगियों से टकरा गई।
वहीं इस हादसे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा,’…मैं राजनीतिक दलों से आगे आने और मदद करने का अनुरोध करता हूं। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।’ मुझे प्रधानमंत्री और रेल मंत्री से कई सवाल पूछने हैं लेकिन अभी वक्त राहत और बचाव का है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बालासोर ट्रेन दुर्घटना के संबंध में स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे।
आरजेडी प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने बालासोर ट्रेन दुर्घटना पर सरकार को घेरा है और कड़ी कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया,”…जिस तरह से उन्होंने लापरवाही दिखाई और सतर्कता नहीं दिखाई, उससे इतनी बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए… इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.. बड़ी लापरवाही थी, उन्होंने रेलवे को बर्बाद कर दिया…”
सरकार के सूत्रों ने बताया है कि, बहानगा बाजार स्टेशन पर अपलाइन में कोरोमंडल एक्सप्रेस फ़ुल स्पीड से आ रही थी और स्टेशन पर रुकना नहीं था। जबकि डाउनलाइन में यशवंत एक्सप्रेस आ रही यशवंतपुर से हावड़ा की ओर जा रही थी। कॉमन लूप में मालगाड़ी खड़ी थी। ग्रीन सिग्नल कोरोमंडल एक्सप्रेस को मिली थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरी से उतरी गई और कुछ डिब्बे मालगाड़ी से टकरा गए। इसकी 21 बोगियां चपेट में आईं।इनमें से 3 बुरी तरह से पलटकर दूसरी रेल लाइन पर चली गईं। कुछ डब्बे यशवंतपुर एक्सप्रेस से टकराए जिसके बाद हादसा हुआ। हादसे की वजह कोरोमंडल का डीरेल होना है जिसकी वजह से बाक़ी दोनों ट्रेन चपेट में आयी। जब एक्सीडेंट हुआ उस वक्त यशवंतपुर हावड़ा ट्रेन कोरोमंडल एक्सप्रेस को लगभग क्रॉस कर चुकी थी। इसके सिर्फ पीछे के 2 डब्बे क्रॉस होने बाकी थे।”
इस ऐसे समझें कि बहानगा बाजार स्टेशन पर अप और डाउन, दो लूप लाइन हैं। किसी भी ट्रेन को लूप लाइन पर तब खड़ा किया जाता है, जब किसी ट्रेन को स्टेशन से पास कराया जाना हो। बहानगा बाजार स्टेशन पर भी कोरोमंडल एक्सप्रेस और यशवंतपुर हावड़ा एक्सप्रेस को पास कराने के लिए मालगाड़ी को कॉमन लूप लाइन पर खड़ा कराया गया था। कोरोमंडल एक्सप्रेस तेज रफ्तार से मेन अप लाइन से गुजर रही थी, उस समय डाउन लाइन से यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस भी गुजर रही थी। बहानगा बाजार स्टेशन पर इन ट्रेन का स्टॉपेज नहीं है। ऐसे में दोनों ही ट्रेन की रफ्तार तेज थी। बहानगा बाजार स्टेशन से गुजर रही कोरोमंडल एक्सप्रेस अचानक पटरी से उतर गई। पटरी से उतरी कोरोमंडल एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे मालगाड़ी से जा भिड़े। हादसे के समय डाउन लाइन से गुजर रही यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के पीछे के दो डिब्बे भी पटरी से उतरी कोरोमंडल एक्सप्रेस की चपेट में आ गए। कोरोमंडल एक्सप्रेस में लगभग 1257 आरक्षित यात्री और यशवंतपुर एक्सप्रेस में 1039 आरक्षित यात्री सवार थे।
उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार ये ट्रेन दुर्घटना भारत में चौथी सबसे घातक ट्रेन दुर्घटना है। भारतीय रेलवे ने एक बयान में कहा, ट्रेन दुर्घटना की जांच दक्षिण पूर्व सर्किल के रेलवे सुरक्षा आयुक्त एएम चौधरी के नेतृत्व में की जाएगी। रेलवे सुरक्षा आयुक्त नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत आता है। रेलवे सुरक्षा आयोग भारत की एक सरकारी एजेंसी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीनस्थ, यह कमीशन के रूप में 1989 रेल अधिनियम द्वारा निर्देशित, भारत में एक रेल सुरक्षा प्राधिकरण है। एजेंसी रेल दुर्घटनाओं की जांच करती है।
