प्रयागराज: पुरानी पेंशन बहाली की मांग सहित 11 सूत्री मांगों को लेकर जब जब कर्मचारियों शिक्षकों अधिकारियों पेंशनर्स संयुक्त मंच के माध्यम से अपनी आवाज उठाई गई। हजारों की तादाद में कर्मचारियों और शिक्षकों ने सड़क पर उतर अपनी ताकत दिखाई है। बताया गया कि कर्मचारियों ने अवकाश ले कर हड़ताल में शिरकत की। कर्मचारी संघों ने सरकार को एक बार फिर से चेतावनी के लहजे में कहा है कि अगर सरकार जल्दी ही उनकी मांगों पर कोर्ट निर्णय नहीं लेती है, तो प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संघ जोरदार प्रदर्शन करेंगे। सरकार गलत तरीके से षड्यंत्र करके उसे असफल करने में लगी रही। 2018 में की गई हड़ताल को माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल कराकर कमेटी का गठन कर समस्याओं का समाधान न करके टालने का कार्य किया गया और आंदोलन को रुकवाने में सफल रही सरकार द्वारा बनाई गई समिति पुरानी पेंशन बहाली सहित के माध्यम से अन्य मांगों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया अब फिर से 3 वर्ष बाद सरकार अपने कार्यकाल समाप्त कर चुनाव में जा रही है तो फिर से कमेटी के गठन के सहारे हड़ताल के तेवर को कम करना चाह रही है।
कर्मचारी शिक्षक अधिकारी पेंशनर्स अधिकार मंच प्रयागराज के सदस्यों ने कई हजारों की संख्या में दिखाई अपनी ताकत।सरकार पहल नहीं किया तो पुरानी पेंशन बहाल नहीं किया तो दिनांक 30 नवंबर 2021 को करेंगे प्रदेश की राजधानी जाम। दिनांक 28अक्टूबर 2021 को कर्मचारी शिक्षक अधिकारी पेंशनर अधिकार मंच प्रयागराज के बैनर के नीचे जनपद प्रयागराज के कई हजार कर्मचारी शिक्षक अधिकारी पेंशनर्स ने समय 11:00 से 3:00 तक पुरानी जीजीआईसी पत्थर गिरजाघर के पास कई हजार की संख्या में इकट्ठा होकर पुरानी पेंशन बहाली की प्रमुख मांग व अन्य 11 सूत्री मांग पत्र के समर्थन में प्रदर्शन किया।
वक्ताओं ने सरकार की कथनी और करनी में अंतर बताते भाजपा सरकार की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए माननीय विधायक माननीय सांसद एक नहीं चार चार पेंशन शपथ लेने के बाद ले रहे हैं और वहीं पर कर्मचारियों को 40 वर्ष की सेवा करने के बावजूद भी पुरानी पेंशन से वंचित रखा गया है। नवीन पेंशन जुआ पर निर्भर है शेयर आधारित पेंशन दिया जाना कहां तक उचित है। सरकार में न रहते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने पुरानी पेंशन दी जाने की पुरजोर वकालत की थी तथा माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा पुरानी पेंशन बहाली के लिए पत्र भी लिखा गया था जो आजकल सोशल मीडिया में वायरल भी हो गया है सरकार में आते ही भूल गए इससे लगता है कि इनके कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है मंच के 11 सूत्री मांगों पर मंच प्रथम चरण में 5 अक्टूबर 2021 को पूरे प्रदेश में मोटरसाइकिल रैली करते जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन सौंपा था जिसमें अनुरोध किया गया था। कि 27 अक्टूबर तक अगर हमारी मांगों पर सरकार निर्णय नहीं लिया तो 28 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री महोदय को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा मंच द्वारा शासन को प्रेषित मांग में प्रमुख रूप से पुरानी पेंशन बहाली बुढ़ापे की लाठी और सार्थकता पर चर्चा की गई इसके अतिरिक्त कैशलेस चिकित्सा 30- 35 वर्ष की सेवा करने के बाद कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने पर बिना पेंशन के रह गए हैं ऐसे लोगों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद भी सरकार के द्वारा नहीं दिया जा रहा है जिससे उनका बुढ़ापा असुरक्षित है।
अंत में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार दिनांक 29 नवम्बर 2021 तक यदि सरकार कर्मचारियों की इन मांगों पर सकारात्मक विचार करते हुए प्रांतीय नेतृत्व से वार्ता की वार्ता कर समस्याओं का यदि निदान नहीं किया गया तो दिनांक 30 नवंबर 2021 को लखनऊ के इको गार्डन पार्क में लाखों की संख्या में कर्मचारी एवं संविदा कर्मचारी धरना स्थल पर पहुंचकर लखनऊ की सड़कों को जाम करने का काम करेंगे इतने पर भी यदि सरकार नहीं चाहती है तो उसी दिन अगले आंदोलन की घोषणा कर दी जाएगी जिसकी जिम्मेदारी सरकार एवं शासन की होगी। धरने के मुख्य अतिथि सुरेश कुमार त्रिपाठी शिक्षक विधायक विधायक रहे। कार्यक्रम का संचालन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिला मंत्री व मंच के महासचिव विनोद पांडे ने किया।सभा को अध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव संयोजक श्री अजय कुमार भारती राग विराग, राजेंद्र कुमार त्रिपाठी, मनोज शर्मा विनोद द्विवेदी इंजीनियर बी के पांडे प्रदीप कुमार सिंह इंजीनियर शिव शंकर सिंह जितेंद्र चतुर्वेदी सतीश कुमार सिंह सेख कुतुबुद्दीन वसीम अहमद अनुज कुमार पांडे रामसुमेर मंगला प्रसाद पांडे रामकृष्ण मिश्र, प्रमिल श्रीवास्तव,राजकुमार सागर श्याम सूरत पांडे संतोष मिश्रा ओ पी सिंह राजेश्वर प्रसाद शुक्ला विद्या शंकर बाजपेई मोहित कुमार आलोक करिया रामसेवक यादव नारायण सिंह, रानी सिंह ,विभा मिश्रा, अर्चना मिश्रा आदि ने संबोधित किया।
