नई दिल्ली: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की दो को-आप्सन सीटों के लिए 9 जुलाई को होने वाले चुनाव से पहले आज शिरोमणी अकाली दल बादल के उम्मीदवार रविन्द्र सिंह आहूजा का नामांकन रद्द हो गया। दरअसल जागो पार्टी के उम्मीदवार परमिंदर पाल सिंह के द्वारा अकाली उम्मीदवार रविन्द्र सिंह आहूजा के खिलाफ गुरुमुखी लिपि को पढ़ने व लिखने में फेल रहने का लिखित ऐतराज जमा करवाया गया था। जिस पर डायरेक्टर गुरुद्वारा चुनाव ने रविन्द्र सिंह आहूजा का नामांकन रद्द कर दिया। इस बारे में जानकारी देते हुए परमिंदर पाल सिंह ने बताया कि बादल दल ने अपने 4 उम्मीदवारों के कुल 6 नामांकन पत्र दाखिल किए थे, जिसमें से एक उम्मीदवार आहूजा के द्वारा दाखिल दोनों नामांकन पत्र गुरुमुखी लिपि को सही से ना लिख व पढ़ सकने के कारण रद्द हो गए है। जबकि एक अन्य अकाली उम्मीदवार विक्रम सिंह रोहिणी के खिलाफ मेरे द्वारा दाखिल किए गए ऐतराज को डायरेक्टर गुरुद्वारा चुनाव ने स्वीकार ना करते हुए विक्रम का नामांकन वैध करार दे दिया।
परमिंदर पाल सिंह ने बताया कि विक्रम के द्वारा अपने आप को नैतिक कदाचारी व अमृतधारी बताने के दिए गए ऐफिडेविट पर मैंने ऐतराज जताया था। क्योंकि अमृतधारी मनुष्य के लिए निषेध 4 कार्यों में से 1 कार्य करने का विक्रम पर 2018 में आरोप लगा था। इस वजह से अमृत खंडित हुआ माना जाना चाहिए था। साथ ही उक्त निषेध कार्य नैतिक आचरण के खिलाफ था, इसलिए उम्मीदवार की जरूरी योग्यता इससे प्रभावित होती है। लेकिन डायरेक्टर ने विक्रम के ऐफिडेविट को सही मानते हुए मेरे लिए ऐतराज को नहीं माना। इसलिए अब विक्रम की उम्मीदवारी को अदालत में जागो पार्टी चुनौती देगी। परमिंदर पाल सिंह ने कहा कि बादल दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के लिए यह परीक्षा की घड़ी है, क्योंकि उनके उम्मीदवार के नैतिक कदाचार पर प्रश्न चिन्ह लगा है। यदि अभी भी बादल उसे चुनाव लड़ाते हैं, तो यह माना जाएगा कि अकाली दल के लिए असूल अहमियत नहीं रखते। एक तरफ शिरोमणी कमेटी के सदस्य सुच्चा सिंह लंगाह की आपत्तिजनक वीडियो के बाद उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब पंथ से निष्कासित करता है और लंगाह अभी भी पंथ में वापसी के लिए बार-बार गुहार लगा रहे है। वहीं दूसरी तरफ चीफ़ खालसा दीवान के पूर्व प्रमुख चरणजीत सिंह चड्ढा को भी आपत्तिजनक वीडियो के बाद पद से हटाकर पंथ से निकाला गया था। यहीं कारण है कि बादल दल में नैतिक कदाचार की उल्लंघना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
