केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शनिवार (20 मई) को 1984 के सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ चार्जशीट दायर की। जांच एजेंसी ने टाइटलर पर हत्या, दंगा और उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। उन पर एक भीड़ को भड़काने और उकसाने का आरोप लगाया गया है, जिसके कारण एक गुरुद्वारे में तीन सिखों की मौत हो गई। घटना के 14 साल बाद वर्ष 2000 में न्यायमूर्ति नानावती जांच आयोग का गठन किया गया था। गृह मंत्रालय ने टाइटलर और अन्य के खिलाफ मामले की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश जारी किया था।
सीबीआई अधिकारियों ने बताया है कि नवंबर 1984 में दिल्ली के पुल बंगश गुरुद्वारे में हिंसा भड़काने के पीछे टाइटलर का हाथ था। एक अधिकारी ने कहा- ‘साक्ष्य से पता चलता है कि आरोपी जगदीश टाइटलर ने 1 नवंबर 1984 को दिल्ली के आजाद मार्केट में गुरुद्वारा पुल बंगश में इकट्ठी हुई भीड़ को कथित रूप से उकसाया, उकसाया और उकसाया जिसके परिणामस्वरूप वहां आग लग गई, जिसमें तीन सिख लोग मारे गए। कई दुकानों को भी जला दिया गया और लूट लिया गया।’
11 अप्रैल को सीबीआई ने मामले में उपलब्ध ऑडियो सबूतों के साथ मिलान करने के लिए टाइटलर की आवाज के नमूने एकत्र किए थे। हालांकि, टाइटलर ने बार-बार जोर देकर कहा है कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
सीबीआई को अपनी आवाज का नमूना सौंपने के बाद जगदीश टाइटलर ने कहा, “मैंने क्या किया है? अगर मेरे खिलाफ सबूत मिले तो मैं फांसी लगाने को तैयार हूं। यह 1984 के दंगों के मामले से संबंधित नहीं था, जिसके लिए वे मेरी आवाज (नमूना) चाहते थे, बल्कि एक और मामला था।”
मालूम हो कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के एक दिन बाद 1 नवंबर 1984 को पुल बंगश इलाके में हुए दंगों में कम से कम तीन लोग मारे गए थे। 1984 में इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के कारण देश में सिख समुदाय पर हिंसक हमले हुए थे।
