आम जनता बढ़ती महंगाई से त्रस्त हो गई है। पहले चीनी और अब प्याज़ की कीमतों के आसमान पर चढ़ जाना। गरीब की थाली में ना दाल है, ना चीनी और अब प्याज़ भी गायब है। लेकिन सरकार को इन जरूरी मुद्दे शायद इतने महत्वपूर्ण नहीं लगते जिन पर चर्चा होनी चाहिए। महंगाई पर पीछे के एक दशक में कभी खुलकर कोई प्रदर्शन नहीं हुये। ना स्मृति ईरानी धरने पर बैठी।
पिछले एक महीने में देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमत दोगुनी हो चुकी है। शनिवार को इसकी औसत कीमत 42 रुपये प्रति किलो हो गई, जो पिछले साल से 45% और पिछले महीने से 19% ज्यादा है।
दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमत 65 रुपये प्रति किलो पहुंच चुकी है जबकि एक साल पहले यह 35 रुपये थी। इसी तरह चेन्नई में प्याज 58 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जबकि पिछले साल यह 33 रुपये था। केरल और असम के कुछ हिस्सों में भी प्याज की कीमत ज्यादा है।
देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी नासिक की कीमत में पिछले एक महीने में 76 फीसदी तेजी आई है। प्याज की कीमत बढ़ने के कई कारण बताए जा रहे हैं। मॉनसून की अनिश्चितता के कारण बुवाई में देरी, कमजोर आवक और सरकारी खरीद में गिरावट से प्याज की कीमत बढ़ी है। रही-सही कसर जमाखोरों ने पूरी कर ली।
कांदा एक्सप्रेस
प्याज की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक बाजार में उतारने का फैसला किया है। केंद्र सरकार आज से नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाएगी। इन इलाकों में प्याज की कीमत राष्ट्रीय औसत से ज्यादा हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्याज की कीमत को कम कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में प्याज की मांग को पूरा करने के लिए सरकार और किसान, दोनों के पास पर्याप्त स्टॉक है। बाजार के जानकारों का कहना है कि महाराष्ट्र में खरीफ प्याज के उत्पादन में 5-7% की गिरावट की खबरों के कारण कीमतें बढ़ी हैं। महाराष्ट्र देश में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक है।
कितनी बढ़ी कीमत?
मंडी में एक महीने पहले प्याज का भाव 2050 रुपये क्विंटल था जो अब 3,600 रुपये के पार पहुंच जाता है।
